सत्यप्रकाश थपलियाल : एक विराट व्यक्तित्व - TOURIST SANDESH

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सोमवार, 27 जुलाई 2026

सत्यप्रकाश थपलियाल : एक विराट व्यक्तित्व

 स्व. सत्य प्रकाश थपलियाल एक संस्मरण ....


 सत्यप्रकाश थपलियाल : एक विराट व्यक्तित्व 

प्रखर वक्ता, गरीबों के मसीहा, मातृ-पितृविहीन छात्र-छात्राओं के आशा के किरण व जीवन निर्माता, इस समाज के पथ-प्रदर्शक, उत्तराखण्ड लोक साहित्य एवं सांस्कृतिक मंच के अध्यक्ष स्व0 श्री सत्यप्रकाश थपलियाल जी का निधन 24 जुलाई सन् 2026 को हो गया है, शायद ईश्वर की यही इच्छा थी। लेकिन उनके समाज सुधारक के कार्य हमेशा इस समाज के युवाओं के लिए प्रेरणा-स्रोत एवं पथ-दर्शक के रूप में कार्य करते रहेंगे। 

 ऋषि कण्व की तपस्थली, भरत की जन्मस्थली एवं गढ़वाल के प्रवेश द्वार कोटद्वार में सामाजिक, सांस्कृतिक एवं शैक्षिक उन्नयन के लिए 22 नवम्बर, 1998 को ‘‘उत्तराखण्ड लोक साहित्य एवं सांस्कृतिक मंच‘‘ का गठन संस्था के अध्यक्ष श्री सत्यप्रकाश थपलियाल जी की अध्यक्षता में किया गया।

 स्व0 सत्यप्रकाश थपलियाल जी के बारे में बताना चाहूंगा कि थपलियाल जी अपनी प्रकृति-प्रवृत्ति, विचारयुक्त संवेदनशीलता एवं जनहित की प्रबल भावना से सामाजिक कार्यों में मात्र संलग्न ही न हुये अपितु पूर्ण मनोयोग से इस पुनीत कार्य से जुड़े हुये थे। उनकी चिन्तनशीलता, सहृदयता, मधुर वाणी, बहुआयामी व्यक्तित्व एवं कुशल नेतृत्व के धनी होने के कारण सन् 1998 से यह संस्था उनके सानिध्य में निरन्तर कार्यरत है।


 उनके मार्गदर्शन में फरवरी 1999 में कोटद्वार महोत्सव के अवसर पर संस्था द्वारा स्थानीय कलाकारों के सहयोग से एक पौराणिक गाथा गंगू रमोला का मंचन किया गया व तदोपरान्त कई सुप्रसिद्ध नाटिका जैसे तीलू रौतेली, श्रीदेव सुमन, वीर चन्द्र सिंह गढ़वाली व बोतल शराब की (दुर्दशा) नशामुक्ति पर आधारित आदि कई नाटिकाओं का मंचन समय-समय पर विभिन्न अवसरों पर कोटद्वार शहर में किए गये, जिन्हें कोटद्वार भाबर की जनता ने मुक्त कण्ठ से सराहा है।

कारगिल युद्ध में अपने शौर्य और पराक्रम का प्रदर्शन करने वाले क्षेत्र के तीन सैनिकों को संस्था द्वारा सम्मानित किया गया व उनके सम्मान में क्षेत्र के विभिन्न विद्यालयों के छात्र-छात्राओं एवं स्थानीय कलाकारों द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन स्थानीय मालवीय उद्यान में किया गया।

 अपनी सामाजिक एवं सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण एवं सम्वर्धन के लिए कई कार्यक्रमों के साथ-साथ नवसंवत्सर ‘‘चैत्र शुल्क प्रतिपदा‘‘ को भी कई वर्षों तक स्थानीय कलाकारों एवं कीर्तन मण्डलियों के सहयोग से मालवीय उद्यान में धूमधाम से मनाया गया व सभी प्रतिभागियों को पुरुषकृत भी किया गया।

 उन्ही के मार्गदर्शन में होली के पावन त्यौहार में आ रही विकृति को दूर कर त्यौहार की गरिमा एवं पवित्रता को बनाए रखने के लिए उनके द्वारा नगर के समस्त नागरिकों को साथ लेकर सन् 1999 से अत्यन्त सादगी व शालीनता से होली का त्यौहार मनाने का निर्णय लिया और तब से कई वर्षों तक नगर में होली का त्यौहार उनके मार्गदर्शन में बड़ी शालीनता से मनाया गया। संस्था को यह बताते हुए हर्ष है कि इस पहल को कोटद्वार के लोगों ने गम्भीरता से लिया और होली के अवसर पर झगड़े एवं मधपान जैसी दुष्प्रवृत्तियां कुछ कम करने में सफल हुई है।

 उन्हीं के मार्गदर्शन में पर्यावरण की शुद्धि के लिए लगभग 300 वृक्ष श्री सिद्धबली मंदिर में लगाए गए जो कि आज पर्यावरण शुद्धि के लिए सहायक बने हुए हैं। 

 वर्ष 2001 में कोटद्वार-भाबर के हाईस्कूल व इण्टरमीड़िएट विद्यालयों के कक्षा-10 व 12वीं की बोर्ड परीक्षा में विद्यालय स्तर पर प्रथम, द्वितीय व तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले छात्र-छात्राओं को उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिये सम्मानित किया गया व वर्ष 2003 व 2004 में दुगड्डा ब्लॉक के 10वीं व 12वीं की बोर्ड परीक्षा में विद्यालय स्तर पर प्रथम व साथ ही साथ उत्तराखण्ड की मेरिट सूची में प्रथम 25 स्थान प्राप्त करने वाले छात्र-छात्राओं को कोटद्वार में आयोजित एक भव्य कार्यक्रम में सम्मानित किया गया।

 उनकी जो एक सकारात्मक सोच कि हमारे कोटद्वार ही नही बल्कि दुगड्डा ब्लॉक के समस्त बच्चे शिक्षा के क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभाए व इस कोटद्वार का नाम उत्तराखण्ड व देश में रोशन करें। सी0बी0एस0ई0 बोर्ड में हमारी एक छात्रा ने पूरे भारत में प्रथम स्थान प्राप्त करके देश को गौरान्वित किया। हमें इस बात का संतोष है कि स्व0 थपलियाल जी केे इस प्रयास ने कोटद्वार ही नहीं बल्कि हमारे सम्पूर्ण क्षेत्र में शिक्षा का स्तर ऊंचा उठाने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

 गरीब, परिवारों के छात्र एवं छात्राओं के लिए तथा उनके नैतिक उत्थान के लिए संस्था द्वारा विभिन्न प्रकार के कार्यक्रम किए गये व समाज के दानी-मानी लोगों के सहयोग से उन्हें स्वेटर व वस्त्र भेंट किए गये। स्व0 थपलियाल जी की पहल पर कई ईश्वर के परोपकारी धनी पुत्र गरीब परिवारों के मेधावी छात्र एवं छात्राओं के प्रवेश शुल्क, किताब, ड्रेस आदि के सहयोग के लिए तत्परता से खड़े रहते थे।

  स्व0 थपलियाल जी के सानिध्य में समय-समय पर निर्धन परिवार की कन्या विवाह हेतु आर्थिक मदद व आवश्यक सामान कई परिवारों को प्रत्येक वर्ष दी जाती थी।

  स्व0 थपलियाल जी की मधुरवाणी व सामाजिक कार्यों में पारदर्शिता ने समाज के उस धनी वर्ग का भी दिल जीत लिया था जो कि वास्तव में समाज सेवा करना चाहते थे, लेकिन स्वयं में समय का अभाव व समाज में उचित माध्यम के न मिलने के कारण समाज सेवा करने से वंचित रह जाते थे। थपलियाल जी ने उन्ही दानी व परोपकारी लोगों के माध्यम से उत्तराखण्ड में आई आपदा में 2000 स्वेटर व 51 रजाईयाँ प्रभावित परिवारों तक पहुंचाई थी। द हंस कल्चरल सोसाइटी ने लगभग 1000 कम्बल व गरीब परिवार के छात्र-छात्राओं के लिए 3000 स्कूली स्वेटर भी प्रदान की और साथ ही साथ कोटद्वार-भाबर में ही नहीं बल्कि पौड़ी गढ़वाल के सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में लगभग 2500 से 3000 स्वेटरें प्रतिवर्ष स्कूली छात्र-छात्राओं को प्रदान की जाती थी। हम इनके इस परोपकारी व समाज सेवा की भावना को बार-बार नमन करते हैं।

  स्व0 थपलियाल जी का भाव व उद्देश्य बहुत ही स्पष्ट था कि समाज में व्याप्त बुराइयों को समाप्त करने व एक मनोहारी वातावरण बनाने के लिए मनसा, वाचा, कर्मणा कार्यरत थे, सुविचारी व महान चिन्तक स्व0 सत्यप्रकाश थपलियाल जी के संयोजन में विभिन्न विद्यालयों में जाकर नशाबन्दी व छात्रों पर पड़ने वाली पश्चिमी संस्कृति के प्रभाव पर भी समय-समय पर कार्यशाला आयोजित की गयी और छात्रों के चारित्रिक व नैतिक उत्थान के लिए स्व॰ राधाकृष्णन, स्वामी विवेकानन्द, विनोबा भावे एवं जयप्रकाश नारायण जैसे महान समाज सुधारक व चिन्तकों के विचारों को बच्चों तक पहुँचाने का निरन्तर प्रयास किया गया। मुझे यह बताने में अपने आप में भी गर्व महसूस हो रहा है कि स्व0 थपलियाल जी केवल एक समाज सेवक ही नहीं थे बल्कि वे एक अच्छे कवि भी थे और इसी का परिणाम है कि उन्होंने एक पुस्तक ‘‘चिन्तन के स्वर‘‘ लिखी, जो कि हमारी भावी पीढ़ी के लिए काफी लाभदायक सिद्ध होगी।

   संस्था के कर्मठ व सुयोग्य अध्यक्ष स्व0 सत्यप्रकाश थपलियाल जी का चिन्तन व मंथन केवल महापुरूषों के विचारों तक सीमित नहीं रहा, उनका चिन्तन व उनकी काक चेष्ठा हमारे देश की भावी पीढ़ी के लिए कितना समर्पित है जिसका अन्दाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने एक पाँच सूत्रीय कार्यक्रम स्वयं तैयार किया जिसमें विशेष रूप से (1) स्वच्छता (2) प्रार्थना (3) पढ़ाई (4) परस्पर प्रेम (5) सेवा सूत्र व शिक्षा में सुधार हेतु व्याख्यान माला का आयोजन विद्यालयों में जा-जाकर डेढ़ से दो घण्टे तक बिना रूके-थके कहना अपने आप में एक अद्वितीय प्रयास थे, उन्होंने कोटद्वार-भाबर व उत्तराखण्ड ही नहीं बल्कि देशभर में आध्यामिक संत सचितानंद भारती के साथ लगभग 10 दिनों तक आगरा, अजमेर, झांसी व बरेली आदि शहरों में अपने नेक व परोपकारी विचार पहुँचाने का अथक प्रयास किया और लोगों ने उनके इन विचारों को मुक्त कण्ठ से सराहा। उनका एक विशेष प्रयास ‘‘शिक्षा ही नहीं विद्या भी चाहिए‘‘ अपने आप में एक उल्लेखनीय कार्य है।  

 स्व0 थपलियाल जी ने सदैव धरातल से जुड़कर कार्य करने का प्रयास किया और इसी कड़ी में उनके सहयोग से एक विशेष भण्डारे का आयोजन किया गया। यह भण्डारा गरीब, निःसहाय व कुष्ठ रोगियों के लिए विशेष रूप से आयोजित किया गया था। साथ ही साथ कई बार शीतकालीन में 

कम्बल वितरण का कार्यक्रम भी नि:सहाय लोगों के लिए किया जाता था।

   वर्ष 2014 से दुगड्डा, द्वारीखाल, जयहरीखाल, यमकेश्वर एवं पौड़ी ब्लॉक में लगभग 75-80 मातृ-पितृविहीन छात्र/छात्राओं को रू॰ 500/- प्रतिमाह, यानी रु. 6000/- वार्षिक आर्थिक सहयोग राशि प्रदान की जाती रही। यह सहायता स्व0 थपलियाल जी केे अस्वस्थ होने तक यानी गतवर्ष 2025 तक निरंतर मिलती रही।

  किसी ने क्या खूब कहा है-

मकसद रखो दिल जीतने का,

तख्त, ताज और शोहरत सब,

यहीं रह जाते है।

सिकंदर दुनिया जीत कर भी,

खाली हाथ गया,

नाम जिंदा वही रहे जो, 

दूसरों के दिल में बस जाते है।।

अजयपाल सिंह रावत (सचिव)

उत्तराखण्ड लोक साहित्य एवं सांस्कृतिक मंच, कोटद्वार

     एवं

    प्रबन्धक

ज्ञान भारती पब्लिक स्कूल

नजीबाबाद रोड़, शिवालिक नगर, कोटद्वार

     पौड़ी गढ़वाल।

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