उत्तराखण्ड डिप्लोमा इंजीनियर्स महासंघ ने दिखाई ताकत
न्योचित मांगों को मनवाने के लिए हड़ताल होने की स्थिति में प्रदेश सरकार जिम्मेदार - इं0 आर0 सी0 शर्मा, प्रान्तीय अध्यक्ष, डि0 इं. महासंघ, उत्तराखण्ड
देहरादून। उत्तराखण्ड डिप्लोमा इंजीनियर्स महासंघ ने राज्य सरकार से अपनी 27 सूत्रीय मांगों को मनवाने के लिए देहरादून में रैली निकाल कर सरकार को अपनी ताकत का एहसास करवाया। महासंघ के प्रान्तीय अध्यक्ष रमेश चन्द्र शर्मा ने कहा कि, उत्तराखण्ड शासन द्वारा डिप्लोमा इंजीनियर्स की समस्याओं पर अभी तक कोई भी सकारात्मक संज्ञान न लिए जाने के कारण डिप्लोमा इंजीनियर्स के पूर्व निर्धारित आन्दोलन कार्यक्रम के क्रम में सोमवार को डिप्लोमा इंजीनियर्स की प्रदेश व्यापी रैली आहूत की गयी है जिसमें की गढवाल एवं कुमांऊ मण्डल के लगभग 4500 इंजीनियर्स द्वारा प्रतिभाग किया जा है। उन्होंने बताया कि, यदि उक्त रैली के पश्चात भी हमारी समस्याओं का समाधान नही किया जाएगा तो डिप्लोमा इंजीनियर्स को मजबूरन हडताल जैसा कठोर कदम उठाने को बाध्य होना पडेगा तथा निर्माण कार्यों की प्रगति पर पडने वाले प्रतिकूल प्रभाव की सम्पूर्ण जिम्मेदारी उत्तराखण्ड शासन की होगी साथ ही उन्होंने यह भी कहा है कि डिप्लोमा इंजीनियर्स का यह संघर्ष केवल वेतन या पदोन्नति का नही बल्कि उनके सम्मान और न्याय का भी है।
महासचिव इं0 वीरेन्द्र गुसांई न कहा कि प्रदेश का प्रत्येक अभियन्ता एकजुट है और अंतिम निर्णय तक अपनी मांगों के निराकरण हेतु प्रतिबद्ध है। संगठन की एकता ही इसकी सबसे बडी शक्ति है। साथ ही उन्होने बताया है कि प्रदेश के समस्त अभियन्ता साथियों द्वारा सक्रिय सहभागिता की जा रही है, जो संगठन की व्यापक एकजुटता का प्रमाण है। उन्होंने बताया कि, डिप्लोमा इंजीनियर्स महासंघ के सदस्यों की 27 सूत्रीय मांगों का निराकरण न होने के कारण डिप्लोमा इंजीनियर्स का विगत दो फरवरी से प्रथम चरण का आन्दोलन गतिमान है जिसमें की प्रदेश की सभी शाखाओं में तथा दस फरवरी को प्रदेश के सभी जनपदों में समस्त डिप्लोमा इंजीनियर्स द्वारा बैठक आहूत की गयी। इसी क्रम में अठारह फरवरी को प्रत्येक जनपद मुख्यालय पर एक दिवसीय धरना दिया गया तथा जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन प्रेषण किया गया।
महासंघ की प्रमुख मांगे
डिप्लोमा इंजीनियर्स की वर्ष 2006 से चली आ रही वेतन विसंगति का पूर्ण समाधान करते हुए प्रारंभिक ग्रेड वेतन रू0 4600 प्रदान किया जाए।
डिप्लोमा इंजीनियर्स को 10,16 एवं 26 वर्ष की सेवा पूर्ण करने पर समयबद्ध पदोन्निति एवं पदोन्नत वेतनमान सुनिश्चित किया जाए।
01 जनवरी 2014 के पश्चात नियुक्त कनिष्ठ अभियन्ताओं को 10 वर्ष की सेवा पूर्ण होने पर ग्रेड पे रू0 5400 (लेवल-10) का लाभ प्रदान किया जाए।
01 अक्टूबर 2005 के पश्चात नियुक्त अभियन्ताओं हेतु पुरानी पेंशन बहाल की जाए।
विभागों में पदोन्नति अनुपात में सुधार, तकनीकी संवर्ग का पुनर्गठन एवं रिक्त पदों की शीघ्र पूर्ति की जाए।
फील्ड में कार्यरत अभियन्ताओं को सामाजिक सुरक्षा बीमा की सूविधा प्रदान की जाए।
उत्तराखण्ड में कार्यरत बहारी कार्यदायी संस्थाओं के स्थान पर उत्तराखण्ड की कार्यदायी संस्थाओं से कार्य करवाए जाए।
उत्तराखण्ड पेयजल विभागों का एकीकरण करते हुए राजकीय करण किया जाए।
अभियन्ताओं की पदोन्नति हेतु समान अवसर उपलब्ध न होने के कारण सहायक अभियन्ता से ऊपर के पदों पर पदोन्नति हेतु समानान्तर गैलरी की व्यवस्था की जाए।
आवास विभाग में नव नियुक्त डिप्लोमा इंजीनियर्स को अंशदायी पेंशन योजना का लाभ दिया जाए।
तकनीकि कार्यों में राजनैतिक एवं प्रशासनिक हस्ताक्षेप बंद किया जाए।
स्थानान्तरण अधीनियम में कार्मिकों की सुविधा अनुसार आवश्यक संशोधन किये जाए।
उरेडा में नव नियुक्त कनिष्ठ अभियन्ताओं को प्रदेश के अन्य विभागों में कार्यरत कनिष्ठ अभियन्ताओं की भांति ग्रेड पे रू0 4200 के स्थान पर ग्रेड पे रू0 4600 किया जाए।
लोक निर्माण विभाग के पूर्व में स्वीकृत 02 वृत्त एवं 08 खण्डों को पुनर्जिवित किया जाए।
कृषि विभाग एवं जिला पंचायत में भी अन्य समस्त अभियन्त्रण विभागों की भांति विभागीय ढांचा स्वीकृत किया जाए।
विभिन्न तकनीकि विभागों के लम्बित विभागीय ढांचे का पूर्नगठन किया जाए।
समस्त अभियन्त्रण विभागों में निर्माण कार्यों के सम्पादन एवं अनुश्रवण हेतु फील्ड स्टॉफ की भारी कमी को देखते हुए अविलंब फील्ड स्टॉफ को नियुक्त किया जाए।
डिप्लोमा इंजीनियर्स संवर्ग से सम्बन्धित शासन के वित्त एवं कार्मिक विभाग द्वारा जारी होने वाले शासनादेशों को समस्त विभागों हेतु लागू किया जाए।
विभागीय अभियन्ताओं की डयूटी गैर तकनीकि कार्यों में न लगाई जाए।
राज्य हित में डिप्लोमा इंजीनियर्स के लिए भी उच्च शिक्षा को प्रोत्साहित करने हेतु विभागीय स्तर से डिग्री करने हेतु प्रबंध किया जाए।
https://youtu.be/Yoq32EPZwuA

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