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सोमवार, 23 फ़रवरी 2026

मुंशी हरिप्रसाद टम्टा की 66वीं पुण्यतिथि पर अर्पित की श्रद्धांजलि

 

 मुंशी हरिप्रसाद टम्टा की 66वीं पुण्यतिथि पर अर्पित की श्रद्धांजलि 


कोटद्वार। उत्तराखंड के सामाजिक क्रान्ति के अग्रदूत प्रसिद्ध समाज सुधारक मुंशी हरिप्रसाद टम्टा की 66वीं पुण्यतिथि पर शैलशिल्पी विकास संगठन द्वारा उनकी पुण्यतिथि पर वार्ड नं 22 सिम्मलचौड़ स्थित उत्तराखंड रत्न,कर्मवीर जयानंद भारतीय स्मृति पुस्तकालय में उनके चित्र पर पुष्प अर्पित करते हुए श्रद्धांजलि दी गई ।

संगठन के प्रदेश अध्यक्ष विकास कुमार आर्य ने कहा कि मुंशी हरिप्रसाद टम्टा का जन्म मानों उत्तराखंड के मूलनिवासी शिल्पकार समाज के लाखों शोषित पीड़ित वंचित समाज के लोगों को प्रगतिपथ पर अग्रसर करने एवं उन्हें उनके मानवीय अधिकार दिलाने के लिए हुआ, उन्होंने जीवन पर सामाजिक सुधार के उत्कृष्ट कार्य किए, उनकी सामाजिक सेवाओं को देखते हुए अंग्रेजी हुकूमत ने भी उन्हें कई बार सम्मानित किया गया, अंग्रेज शासन में उन्हें रायबहादुर की उपाधि से भी नवाजा गया, उन्हें पायनियर रेजिमेंट द्वारा 1941 में लखनऊ में गार्ड ऑफ ओनर दिया गया,1934 में उन्हें उत्तरप्रदेश डिप्रेस्ड क्लास लीग के अध्यक्ष के रूप में चुना गया, 1945 से 1952 तक आप अल्मोड़ा नगर पालिका के अध्यक्ष रहे,उन्हें 1935 में सरकार द्वारा  स्पेशल मैजिस्ट्रेट नियुक्त किया गया था, 1936 में मुंशी जी गोण्डा उत्तर प्रदेश से निर्विरोध विधायक चुने गए।

1920 में मुंशी हरिप्रसाद टम्टा द्वारा उत्तराखंड प्रदेश के शिल्प पेशे से जुड़े लाखों लोगों को शिल्पकार शब्द के रूप में जाति की मान्यता देने के लिए ब्रिटिश सरकार से आग्रह किया एवं वर्ष 1926 में अंग्रेज सरकार द्वारा शिल्पकार समाज को जाति के मान्यता प्रदान कर एक सम्मानित नाम दिया गया, ये कार्य मुंशी हरिप्रसाद टम्टा जी के जीवन की महत्वपूर्ण उपलब्धियों में शामिल हैं, उन्होंने भारत की आजादी से पूर्व 1931 में लंदन में आयोजित गोलमेज सम्मेलन में ब्रिटिश प्रधानमंत्री को समुद्री मार्ग से तार भेजकर संदेश पहुंचाया जिसमें लिखा गया था कि गोलमेज सम्मेलन में भारत के दलितों के एकमात्र प्रतिनिधि डॉक्टर अंबेडकर हैं, जबकि उस समय गांधी जी भी सम्मेलन में शामिल थे, टम्टा जी एक कई भाषाओं के ज्ञाता और बेहतरीन लेखक भी थे उन्होंने 1934 में समता नामक साप्ताहिक समाचार पत्र निकाला, उत्तराखंड की इस महान विभूति का आज ही के दिन 23 फरवरी 1960 को प्रयाग में आपका परिनिर्वाण हुआ।

पुण्यतिथि के इस अवसर पर सेवानिवृत प्रधानाचार्य मनवर लाल भारती द्वारा अपनी हस्तलिखित पुस्तक, शिल्पकार समाज की चेतना के अग्रदूत, उत्तराखंड के अम्बेडकर राय बहादुर मुंशी हरिप्रसाद टम्टा का वितरण किया गया, उन्होंने कहा कि शिल्पकार समाज अगर स्वयं के इतिहास को जानना चाहता है तो उन्हें मुंशी हरिप्रसाद टम्टा की जीवनी को पढ़ना चाहिए।

इस अवसर पर एडवोकेट जीवन कुमार जोनी, सेवानिवृत रेंजर केशीराम निराला, अरविंद कुमार, मिथलेश कुमार, शुभम, हर्ष कुमार आशीष कुमार, सचिन कुमार आदि लोग मौजूद थे।

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