नहीं रहे मानवता की प्रतिमूर्ति : सत्य प्रकाश थपलियाल - TOURIST SANDESH

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शनिवार, 25 जुलाई 2026

नहीं रहे मानवता की प्रतिमूर्ति : सत्य प्रकाश थपलियाल

 स्मृति शेष......

नहीं रहे मानवता की प्रतिमूर्ति : सत्य प्रकाश थपलियाल

सुभाष चन्द्र नौटियाल 





मध्य हिमालयी क्षेत्र सदा रत्नप्रसूता रहा है। इस माटी में जन्म लेने वाले अनेक महापुरुषों ने मानव जीवन में उच्च मानवीय संवेदनाओं को भरकर जीने की नई राह तैयार की तथा जीवन में मानवीय भावों को सदैव उच्चतम स्थान प्रदान किया है। मानवीय संवेदनाओं से परिपूर्ण ऐसे श्रेष्ठ मानवों का जीवन सदैव सामाजिक सरोकारों तथा मानव सेवा के लिए ही समर्पित रहा है। ऐसे ही उच्च मानवीय गुणों से परिपूर्ण एक श्रेष्ठ मानव, मानवता की प्रतिमूर्ति थे सत्य प्रकाश थपलियाल। 

मानव सेवा के लिए समर्पित उनका कर्मपथ ही उनका जीवन परिचय बन चुका था। समाज सेवा के अग्रदूत सत्य प्रकाश थपलियाल ने जब 24 जुलाई 2026 को रात 10.0 बजे के आस-पास अन्तिम सांस ली तो मानवीय संवेदनाओं को अन्तरंगता से महसूस करने वाला एक मानवीय वीर योद्धा धरती से अलविदा हो गया। वे काफी समय से अस्वस्थ चल रहे थे।

मानवता की प्रतिमूर्ति सत्य प्रकाश थपलियाल का जन्म 4 मई 1940 को ग्राम- चिलोली, पट्टी - असवालस्यूं, जिला-पौड़ी गढ़वाल, उत्तराखण्ड में एक साधारण परिवार में हुआ था। उनके पिता का नाम महात्मा रामरतन थपलियाल, माता का नाम प्रतिमा देवी तथा सहधर्मिणी का नाम कृष्णा थपलियाल था। स्व. कृष्णा थपलियाल भी एक प्रतिष्ठित शिक्षिका थी। आपके पिता रामरतन थपलियाल प्रतिष्ठित हिन्दी पुस्तक 'विश्वदर्शन' के रचयिता थे। बाद में इस पुस्तक का अंग्रेजी तथा जापानी भाषा में भी अनुवाद किया गया। आपके पिता द्वारा दिये गये अध्यात्मिक संस्कार आपके अन्दर मौजूद थे।

 उनकी प्राथमिक शिक्षा प्राथमिक विद्यालय किमोली, पौड़ी गढ़वाल में हुई, आपने हाईस्कूल देहरादून से तथा इण्टरमीडिएट श्रीनगर गढ़वाल से किया। बी.ए. तथा एम.ए. राजनीति शास्त्र लखनऊ विश्वविद्यालय तथा अर्थशास्त्र में एम.ए गढ़वाल विश्वविद्यालय से किया।

सन् 1972 में उत्तर प्रदेश राजकीय माध्यमिक शिक्षा में सेवाएं देना शुरू किया तथा राजकीय इण्टर कॉलेज नौगांव खाल, जिला - पौड़ी गढ़वाल में नागरिक शास्त्र के प्रवक्ता नियुक्त हुए। सन् 1998 में राजकीय इण्टर कॉलेज कोटद्वार से सेवानिवृत्त हुए।


समाज में योगदान 

सेवानिवृत्ति के बाद आपने मन, वचन तथा कर्म से अपना जीवन समाज सेवा के लिए समर्पित कर दिया। अपने आस-पास प्रत्येक जरूरतमंद की सेवा करना ही आपने अपने जीवन का लक्ष्य मान लिया, इसके साथ ही युवाओं तथा बच्चों को सुसंस्कारित करने के लिए भी आपने अभियान छेड़ा। कोटद्वार तथा आसपास के माध्यमिक विद्यालयों में 'शिक्षा ही नहीं विद्या भी चाहिए' तथा 'नशा नहीं, शिक्षा अपनाओ' का अभियान छेड़ कर आपने विद्यार्थियों को सुसंस्कारित तथा राष्ट्र का जिम्मेदार नागरिक बनाने के लिए निरन्तर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किये। समाज हित के इन प्रयासों ने समाज का ध्यान आपकी ओर आकृष्ट किया। साथ ही होली, दीपावली, सनातन नववर्ष जैसे पवित्र त्यौहारों के सांस्कृतिक महत्व को उजागर करने के लिए जागरुकता कार्यक्रमों के आयोजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उत्तराखण्ड लोक साहित्य एवं सांस्कृतिक मंच के आप संस्थापक अध्यक्ष रहे, वर्तमान में यह संस्था मातृ-पितृ विहीन बच्चों के लिए समय-समय पर फीस, पुस्तकें तथा स्कूल ड्रेस की व्यवस्था करती है।

समाज के प्रति सच्ची सेवाभाव को देखते हुए समय-समय पर अनेक सामाजिक संस्थाओं ने आपको अनेक सम्मानों से सम्मानित कर विभूषित किया।

इस वर्ष जब भावी पीढ़ी को संस्कारयुक्त, नशामुक्त बनाने के लिए जागरुकता कार्यक्रमों के आयोजन के लिए कण्वनगरी संस्कारशाला का गठन किया गया तो आप इस के मुख्य प्रेरक तथा मार्गदर्शक रहे। आपके द्वारा ही कण्वनगरी संस्कारशाला की आधारशिला रखी गयी। सादगीभरा, संस्कारित, उदारचित्त, त्याग, तपस्या से परिपूर्ण आपका जीवन आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव मार्गदर्शन करता रहेगा।

आपके द्वारा रचित पुस्तक चिन्तन के स्वर आपकी एक बेहतरीन कृति है।

आपने शिक्षा, मानवीय संवेदनाओं से परिपूर्ण संस्कार युक्त, नशामुक्त जीवन तथा सामाजिक न्याय के क्षेत्र में दशकों तक निःस्वार्थ भाव से सेवा की है। मानवीय दृष्टिकोण, करुणा, मानव प्रेम तथा समाज के प्रति समर्पण के भाव के कारण ही आप 'मानवता की प्रतिमूर्ति' कहलाये। उनके निधन से समाज की अपूर्णीय क्षति हुई है। समाज के जागरूक प्रबुद्ध जनों ने उनके प्रति गहरी संवेदनाएं व्यक्त की हैं। आज समाज ने एक नि:स्वार्थ सेवाभावी को खो दिया है। जिसकी भरपाई अब सम्भव नहीं है।

भले ही मानवता की प्रतिमूर्ति सत्य प्रकाश थपलियाल आज हमारे बीच भौतिक शरीर के रूप में उपस्थित नहीं हैं परन्तु समाज सेवा का जो मार्ग आपने तैयार किया है निश्चित रूप से आने पीढ़ी उसका अनुसरण करेगी तथा श्रेष्ठ मानवीय संस्कारों से संस्कारित होते हुए सक्षम, समृद्ध तथा शान्ति पूर्ण जीवन की अनुगामी होगी। यही आपके जीवन की सीख है तथा यही आपके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।


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