सामाजिक उद्यमिता से निकलेगी आर्थिक समृद्धि की राह
सामाजिक उद्यमी स्व विजय सुन्दरियाल एवं क्रान्तिकारी स्व ऋषि बल्लभ सुन्दरियाल की पुण्य तिथि पर याद करते हुए किए श्रद्धासुमन अर्पित
देहरादून। उत्तराखण्ड में सामाजिक उद्यमिता से ही आर्थिक समृद्धि की राह निकलेगी। यह बात स्वरोजगार दिवस (1 जुलाई) के अवसर पर आयोजित विचार गोष्ठी में वक्ताओं के गहन मंथन से निकली। ज्ञात हो कि टूरिस्ट संदेश फाॅउण्डेशन ने सुन्दरियाल प्रोडक्शन के सहयोग से सामाजिक उद्यमिता पर एक विचार गोष्ठी एवं सम्मान समारोह का आयोजन किया था।
दून पुस्तकालय एवं शोध केन्द्र में आयोजित इस कार्यक्रम में उत्तराखण्ड के अनेक ख्यातिलब्ध चिन्तक एवं सामाजिक उद्यमी उपस्थित थे। कार्यक्रम में दीप प्रज्जवलन के साथ ही सामाजिक उद्यमी स्व विजय सुन्दरियाल एवं क्रान्तिकारी स्व ऋषि बल्लभ सुन्दरियाल को उनकी पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि अर्पित की गयी।
पद्मश्री पर्यावरणविद् कल्याण सिंह रावत 'मैती' की अध्यक्षता में आयोजित इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि लैंसडाउन विधानसभा के विधायक, महंत दिलीप रावत, मुख्य वक्ता उत्तराखंड राज्य के वरिष्ठ पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्ता चारू तिवारी, उत्तराखंड राज्य आन्दोलनकारी एवं पूर्व राज्य मंत्री धीरेन्द्र प्रताप सिंह, धाद संस्था के संस्थापक एवं सामाजिक कार्यकर्ता लोकेश नवानी तथा ग्रामीण स्वरोजगार के पुरोधा मनीष सुंदरियाल उपस्थित थे।
कार्यक्रम में पर्वतीय क्षेत्रों में सामाजिक उद्यमिता विकास पर चर्चा की गयी।
सामाजिक उद्यमिता पर चर्चा करते हुए वक्ताओं ने कहा कि, कृषि एवं बागवानी को पाठ्यक्रम में शामिल किया जाए। इसके लिए प्रेशर ग्रुप बनाया जाना चाहिए। पर्वतीय क्षेत्रों में उत्पादकता बढ़ाने तथा तृणमूलार्थी लोकल एकोनामी पर काम पर करने की आवश्यकता है। कृषि के क्षेत्र में अगेती फसलों पर काम होना चाहिए। उत्पादन बढ़ाने के लिए वैकल्पिक फलों पर काम होना चाहिए। उपभोक्ता से उत्पादक बनने के लिए लोकल फोर वोकल पर काम करने की आवश्यकता है। वर्तमान समय में हमारे पर्वतीय क्षेत्रों में जंगली जानवरों का घोर आतंक हो चुका है। जिसके कारण उत्तराखण्ड के पर्वतीय क्षेत्र अनुत्पादक होते जा रहे हैं।
उत्तराखण्ड के पर्वतीय क्षेत्रों में संसाधनों की कमी नहीं है। संसाधनों का सही उपयोग हो इसके लिए पर्वतीय क्षेत्रों के अनुकूलन नीति तैयार करने की आवश्यकता है। पर्वतीय क्षेत्रों में उत्पादकता बढ़ाने के लिए स्थानीय संसाधनों का सही उपयोग होना चाहिए। कार्यक्रम में जनगीतकार सतीश धौलाखण्डी ने जनगीत 'बैठकों में हल टंगे हैं हमारे गांव में....' की प्रस्तुति देकर उपस्थित जनसमुदाय का मन मोह लिया।
कार्यक्रम में ग्रामीण स्वरोजगार जल ,जमीन और जंगल के साथ पर्यावरण का संरक्षण के क्षेत्र में अपना अतुलनीय योगदान देने वाले मनीषियों को सम्मानित किया गया।
सम्मानित होने वाले अतिथि
1. सामाजिक उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए - सामाजिक संस्था 'धाद'
2. साहित्य के क्षेत्र में - श्री शान्ति प्रकाश 'जिज्ञासू', वरिष्ठ साहित्यकार
3. सामाजिक पत्रकारिता के क्षेत्र में - श्री चारु तिवारी, वरिष्ठ पत्रकार
4. सामाजिक उद्यमी - श्रीमती दीपिका डोभाल, महिला उद्यमी
5. पर्यावरण एवं जल संरक्षण के साथ सामाजिक सेवाओं के लिए - श्री सुधीर सुन्दरियाल, फील गुड/भलु लगद संस्था के संस्थापक
6. राष्ट्र कर्तव्यनिष्ठा के प्रति समाज को जागरूक करने के लिए - श्री शान्ति प्रसाद नौटियाल, पूर्व संयुक्त आयुक्त, राज्य कर विभाग उत्तराखण्ड एवं सामाजिक चिंतक
7. सामाजिक पत्रकारिता के लिए - श्री नागेन्द्र उनियाल, पिछले 47 सालों से गढ़वाल की आवाज बना दैनिक समाचार पत्र जयन्त ने जनपक्षिया पत्रकारिता के माध्यम से निरन्तर जनसेवा में सक्रिय
8. पर्यावरण संरक्षण के लिए - श्री त्रिलोक चंद सोनी, पर्यावरणविद्
कार्यक्रम का संचालन सुभाष चन्द्र नौटियाल ने किया।
कार्यक्रम में सामाजिक उद्यमी बीरवान सिंह रावत, कृषि विशेषज्ञ राजेन्द्र कुकसाल, सामाजिक चिन्तक प्रेम बहुखण्डी, चकबन्दी आन्दोलन को धार देने वाले प्रेरक कपिल डोभाल सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित थे।
जनगीत- बैठकों में हल टंगे हैं बल हमारे गांव में..... जनकवि सतीश धौलाखण्डी की शानदार प्रस्तुति
https://youtu.be/g07SXQlMSHY






कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें