दीक्षारंभ (Induction) कार्यक्रम में नवप्रवेशित छात्र-छात्राओं को महाविद्यालय की शैक्षणिक एवं सह-शैक्षणिक गतिविधियों से कराया परिचित
कोटद्वार। राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय , कोटद्वार में नवप्रवेशित छात्र-छात्राओं के लिए दीक्षारंभ कार्यक्रम का आयोजन उत्साह एवं गरिमापूर्ण रूप में किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ महाविद्यालय के संरक्षक प्रोफेसर डी. एस. नेगी तथा मंचासीन वरिष्ठ विभाग प्रभारियों एवं प्राध्यापकों द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया गया।
कार्यक्रम के प्रारंभ में महाविद्यालय के प्राचार्य प्रोफेसर डी. एस. नेगी ने छात्र-छात्राओं का स्वागत करते हुए महाविद्यालय में संचालित विभिन्न शैक्षणिक, सह-शैक्षणिक एवं छात्रोपयोगी गतिविधियों की जानकारी दी। उन्होंने विद्यार्थियों को नियमित रूप से कक्षाओं में उपस्थित रहने तथा न्यूनतम 75 प्रतिशत उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि महाविद्यालय में होने वाली विभिन्न शैक्षणिक एवं सह-शैक्षणिक गतिविधियों में विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी उनके सर्वांगीण विकास के लिए आवश्यक है।
प्राचार्य ने महाविद्यालय के ड्रेस कोड के महत्व पर भी प्रकाश डालते हुए विद्यार्थियों से निर्धारित ड्रेस कोड में महाविद्यालय आने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि ड्रेस कोड महाविद्यालय की गरिमा, अनुशासन, सम्मान एवं विद्यार्थी की पहचान का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री प्राप्त करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों को रोजगार एवं स्वरोजगार के योग्य बनाना भी है। इसी उद्देश्य से महाविद्यालय में विभिन्न व्यावसायिक पाठ्यक्रमों के साथ-साथ देवभूमि उद्यमिता/विकास योजना, कौशल विकास जैसे रोजगारपरक कार्यक्रमों का संचालन किया जा रहा है।
इसी क्रम में,कार्यक्रम में प्रोफेसर दीपक पांडे , महाविद्यालय के राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के नोडल अधिकारी द्वारा परिचयात्मक सत्र आरंभ किया गया जिसमें महाविद्यालय के प्रत्येक विभागों के विभागाध्यक्ष एवं एवं विभाग के सभी प्राध्यापक गणों से का परिचय कराया गया। उन्होंने कहा कि वास्तविक शैक्षणिक उपलब्धि तभी संभव है, जब विद्यार्थी नियमित रूप से कक्षाओं में उपस्थित होकर अध्ययन करें। उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 की प्रमुख विशेषताओं की जानकारी देते हुए कहा कि नई शिक्षा नीति विद्यार्थियों को अपनी रुचि एवं क्षमता के अनुरूप शिक्षा प्राप्त करने के अधिक अवसर प्रदान करती है। इसके अंतर्गत मल्टीपल एंट्री एवं मल्टीपल एग्जिट की विशेष व्यवस्था के साथ प्रमाण-पत्र, डिप्लोमा एवं डिग्री प्राप्त करने के विकल्प उपलब्ध हैं।
उन्होंने विद्यार्थियों को विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं एवं रोजगारपरक अवसरों की जानकारी देते हुए प्रधानमंत्री की युवा-केंद्रित योजनाओं, शैक्षिक भ्रमण योजना, एनसीसी एवं एनएसएस जैसी गतिविधियों के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने एनडीए एवं सिविल सर्विसेज जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को सरकार द्वारा प्रदान की जाने वाली आर्थिक सहायता एवं प्रोत्साहन योजनाओं की जानकारी भी दी।
इसके पश्चात विभागाध्यक्ष बीएड विभाग,प्रोफेसर बी. सी. शाह, शास्तामंडल प्रमुख, ने छात्र-छात्राओं को महाविद्यालय की आचार संहिता से अवगत कराया। उन्होंने विद्यार्थियों को अनुशासन, मर्यादा एवं जिम्मेदार नागरिक के रूप में अपने दायित्वों का निर्वहन करने के लिए प्रेरित किया तथा शास्तामंडल- सलाहकार समिति एवं उपशास्त्रमंडल के सदस्यों एवं उनकी भूमिकाओं से भी परिचित कराया।
डॉ. विनोद भंडारी, एनसीसी प्रभारी एवं चित्रकला विभाग प्रभारी ने विद्यार्थियों को राष्ट्रीय कैडेट कोर (NCC) के महत्व की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि एनसीसी विद्यार्थियों में अनुशासन, नेतृत्व क्षमता, आत्मविश्वास एवं राष्ट्रसेवा की भावना विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने विद्यार्थियों से बताया कि एनसीसी का प्रशिक्षण विभिन्न सरकारी सेवाओं एवं रोजगार के अवसरों में भी विद्यार्थियों के लिए अधिमान अंक के रूप में उपयोगी सिद्ध होता है।
डॉ. जितेंद्र दिवाकर, एनएसएस प्रभारी ने राष्ट्रीय सेवा योजना की गतिविधियों एवं उद्देश्यों की जानकारी देते हुए विद्यार्थियों को सेवा भाव से जुड़ने का आह्वान किया। उन्होंने बताया कि महाविद्यालय में एनएसएस की तीन इकाइयां संचालित हैं और विद्यार्थियों को समाजसेवा, जनजागरूकता तथा राष्ट्र निर्माण की गतिविधियों में सक्रिय सहभागिता करनी चाहिए।
डॉ. मीनाक्षी वर्मा, रेडक्रॉस प्रभारी ने विद्यार्थियों को रेडक्रॉस की गतिविधियों एवं उपयोगिता के बारे में जानकारी दी। उन्होंने छात्र-छात्राओं से ऑनलाइन पंजीकरण कर अधिक से अधिक संख्या में रेडक्रॉस से जुड़ने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि आपदा एवं आपातकालीन परिस्थितियों में रेडक्रॉस के माध्यम से सीखे गए प्राथमिक उपचार एवं अन्य मानवीय सहायता संबंधी कौशल अत्यंत उपयोगी सिद्ध होते हैं।
डॉ. हीरा सिंह बिष्ट, क्रीड़ा प्रभारी ने विद्यार्थियों को शारीरिक शिक्षा एवं खेलों के महत्व से अवगत कराया। उन्होंने कहा कि आज के समय में मानसिक विकास के साथ-साथ शारीरिक स्वास्थ्य भी अत्यंत आवश्यक है। खेलों में सहभागिता से विद्यार्थियों का शारीरिक एवं मानसिक विकास होता है तथा उनमें अनुशासन, टीम भावना एवं नेतृत्व क्षमता का विकास होता है।
इसी क्रम में डॉ. अनुपम भंडारी, योग विभाग प्रभारी ने विद्यार्थियों को योग के महत्व की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि योग व्यक्ति को शारीरिक, मानसिक एवं भावनात्मक रूप से स्वस्थ रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने विद्यार्थियों से नियमित रूप से योग को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाने का आह्वान किया तथा “ योगा फाॅर ऑल” की भावना के अनुरूप स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम में छात्र संघ अध्यक्ष विकास ने भी नवप्रवेशित छात्र-छात्राओं को संबोधित किया। उन्होंने महाविद्यालय एवं विद्यार्थियों की विभिन्न उपलब्धियों को साझा करते हुए छात्र-छात्राओं से महाविद्यालय की गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी करने तथा सकारात्मक सोच के साथ महाविद्यालय परिवार से जुड़ने का आह्वान किया।
दीक्षारंभ कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य नवप्रवेशित विद्यार्थियों को महाविद्यालय के शैक्षणिक वातावरण, विभागों, नियमों, सुविधाओं, सह-शैक्षणिक गतिविधियों एवं रोजगारपरक अवसरों से परिचित कराते हुए उनके सर्वांगीण व्यक्तित्व विकास की दिशा में प्रेरित करना रहा।
कार्यक्रम में सभी संकायों के नव प्रवेशित छात्र छात्राओं के साथ साथ - साथ महाविद्यालय के समस्त प्राध्यापक गण एवं शिक्षणेत्तर कर्मचारी भी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन प्रोफेसर अरविंद अवस्थी, विभाग प्रभारी,हिन्दी विभाग द्वारा किया गया।

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