25 वर्षों में उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था ने बदली दिशा, शिक्षा, पर्यटन और आईटी बने विकास के नए आधार : प्रो. एच.सी. पुरोहित - TOURIST SANDESH

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सोमवार, 10 अगस्त 2026

25 वर्षों में उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था ने बदली दिशा, शिक्षा, पर्यटन और आईटी बने विकास के नए आधार : प्रो. एच.सी. पुरोहित

 25 वर्षों में उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था ने बदली दिशा, शिक्षा, पर्यटन और आईटी बने विकास के नए आधार : प्रो. एच.सी. पुरोहित




पिथौरागढ़, देहरादून।( रविवार 9 अगस्त) उत्तराखंड ने राज्य गठन के 25 वर्षों में औद्योगिक विकास से आगे बढ़ते हुए पर्यटन, शिक्षा, स्वास्थ्य, आईटी, डिजिटल सेवाओं, व्यापार और वित्तीय सेवाओं के क्षेत्र में उल्लेखनीय विस्तार किया है। आने वाले समय में सेवा क्षेत्र, ग्रीन इकोनॉमी, तकनीक और स्थानीय उद्यमिता राज्य की अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। यह बात दून विश्वविद्यालय, देहरादून के प्रबंधन संकाय के संकायाध्यक्ष प्रो. एच.सी. पुरोहित ने कही।

श्री त्रिलोचन उप्रेती स्मृति हिमालयी शोध संस्थान, नगौर (पिथौरागढ़) के तत्वावधान में आयोजित आभासी व्याख्यान श्रृंखला में ‘उत्तराखंड आर्थिक @25 और भविष्य की संभावनाएं’ विषय पर मुख्य वक्ता के रूप में प्रो. पुरोहित ने राज्य की आर्थिक विकास यात्रा और भविष्य की संभावनाओं का विस्तृत विश्लेषण किया।

कार्यक्रम का आयोजन भगवती प्रसाद राघव के दिशा-निर्देशन एवं मार्गदर्शन में किया जा रहा है। कार्यक्रम में अपने विचार व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि इस व्याख्यान श्रृंखला को और व्यापक स्तर पर ले जाने एव विशेषज्ञों के शोध परक व्याख्यान राज्य के आने वाले 25 वर्षों का सामग्र रोड मैप तैयार करने की दिशा में कारगर सिद्ध होगा। श्री राघव के मार्गदर्शन में आयोजित इस व्याख्यान श्रृंखला का उद्देश्य उत्तराखंड के सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक और शैक्षिक विकास से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर सार्थक विमर्श को आगे बढ़ाना है।

औद्योगिक विकास से सेवा क्षेत्र तक बदली अर्थव्यवस्था की दिशा

प्रो. पुरोहित ने कहा कि वर्ष 2000 से 2010 के बीच औद्योगिक विस्तार और सिडकुल की स्थापना ने राज्य की अर्थव्यवस्था को गति प्रदान की। इसके बाद शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यटन और डिजिटल सेवाओं का तेजी से विस्तार हुआ। वर्ष 2020 के बाद स्टार्टअप, आईटी, ग्रीन इकोनॉमी और आधारभूत ढांचे को उन्होंने आर्थिक विकास के नए आधार के रूप में रेखांकित किया।

शिक्षा के क्षेत्र में 25 वर्षों में व्यापक बदलाव

उन्होंने कहा कि राज्य गठन के समय उच्च शिक्षा के अवसर सीमित थे, लेकिन पिछले 25 वर्षों में शिक्षा के क्षेत्र में व्यापक विस्तार हुआ है। सर्व शिक्षा अभियान, माध्यमिक शिक्षा के विस्तार, स्मार्ट कक्षाओं, आईसीटी और डिजिटल शिक्षा से लेकर राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020, मूलभूत साक्षरता एवं संख्याज्ञान (FLN), स्मार्ट स्कूल, बहुविषयक शिक्षा और अकादमिक बैंक ऑफ क्रेडिट (ABC) तक राज्य की शिक्षा व्यवस्था में निरंतर बदलाव आया है।

उन्होंने कहा कि अब शिक्षा व्यवस्था कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), नवाचार, शोध, उभरती तकनीकों और उद्योग से जुड़ी शिक्षा की ओर बढ़ रही है। तकनीकी एवं कौशल शिक्षा को रोजगार से जोड़ना आने वाले समय की प्रमुख आवश्यकता होगी।

पर्यटन और सेवा क्षेत्र बने आर्थिक विकास के प्रमुख आधार

प्रो. पुरोहित के अनुसार उत्तराखंड में पर्यटन का विस्तार उल्लेखनीय रहा है। वर्ष 2000 में लगभग 1.11 करोड़ घरेलू पर्यटक राज्य में आए थे, जबकि वर्ष 2023 में यह संख्या बढ़कर लगभग 5.46 करोड़ हो गई। उन्होंने चारधाम यात्रा के साथ वन्यजीव, साहसिक और प्रकृति-आधारित पर्यटन को बढ़ावा देने तथा पर्यटन को स्थानीय रोजगार और उद्यमिता से जोड़ने पर जोर दिया।

उन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य, आईटी, व्यापार और वित्तीय सेवाओं को सेवा क्षेत्र के प्रमुख स्तंभ बताते हुए कहा कि बैंकिंग और डिजिटल सेवाओं के विस्तार ने राज्य की आर्थिक गतिविधियों को नई गति दी है। आईटी क्षेत्र में बढ़ती गतिविधियां और 300 से अधिक पंजीकृत स्टार्टअप युवाओं के लिए नए अवसरों का संकेत हैं।

कृषि, महिला भागीदारी और हरित अर्थव्यवस्था पर जोर

प्रो. पुरोहित ने कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों में बागवानी, जैविक खेती, स्थानीय उत्पादों, प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन के माध्यम से कृषि को नई अर्थव्यवस्था से जोड़ा जा सकता है। उन्होंने महिला शिक्षा और आर्थिक भागीदारी को राज्य के समावेशी विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बताया।

उन्होंने कहा कि हिमालयी राज्य होने के कारण उत्तराखंड के विकास का मॉडल आर्थिक वृद्धि और पर्यावरण संरक्षण के संतुलन पर आधारित होना चाहिए। ग्रीन इकोनॉमी, आईटी, पर्यटन, शिक्षा, स्वास्थ्य, कौशल विकास और स्थानीय उद्यमिता अगले 25 वर्षों में राज्य की अर्थव्यवस्था के प्रमुख आधार बन सकते हैं।

कार्यक्रम के आयोजक नवीन उप्रेती, सचिव, त्रिलोचन उप्रेती स्मृति हिमालयी शोध संस्थान रहे, जबकि डॉ. मनीष उनियाल, एसोसिएट प्रोफेसर, भौतिकी विभाग, हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय, पौड़ी परिसर कार्यक्रम संयोजक रहे।

आभासी माध्यम से आयोजित इस कार्यक्रम में शिक्षा, शोध, प्रशासन, सामाजिक क्षेत्र और विभिन्न अन्य क्षेत्रों से जुड़े प्रतिभागियों ने सहभागिता की। वक्ता ने उत्तराखंड की 25 वर्षों की आर्थिक यात्रा का विश्लेषण करते हुए इस बात पर बल दिया कि राज्य के अगले 25 वर्षों का विकास स्थानीय संसाधनों, तकनीक, ज्ञान, पर्यावरणीय संतुलन और स्थानीय उद्यमिता के समन्वय से ही अधिक टिकाऊ और समावेशी बनाया जा सकता है।

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