लैंसडाउन का नाम बदलने का किया विरोध
स्व. लीला नन्द लखेड़ा की मूर्ति का उचित रखरखाव की मांग की
कोटद्वार। गढ़वाल पूर्व सैनिक लीग के अध्यक्ष ले.कर्नल बुद्धि बल्लभ ध्यानी ने लैंसडाउन का नाम परिवर्तन का विरोध किया है। जारी एक व्यक्तव्य में उन्होंने कहा है कि, केवल नाम बदलने से क्षेत्र के लोगों का कोई लाभ नहीं होगा। उन्होंने कहा कि उनके सम्मान को अक्षुण्ण बनाये रखने के लिए उनके नाम से उनके पैतृक स्थान में अस्पताल/मेडिकल कॉलेज या एक आईआईटी स्थापित करने के बारे में सोचना चाहिए। जो कि स्थानीय युवाओं को रक्षा बलों में शामिल होने के लिए प्रेरित करेगा तथा नये रोजगार एवं व्यवसाय के अवसर भी सृजित होंगे।
''पौड़ी गढ़वाल में स्थित लैंसडाउन (छावनी और शहर) का नाम बदलकर हमारे शहीद वीर और महावीर चक्र विजेता जसवंत सिंह के नाम पर "जसवंत गढ़" रखना व्यर्थ है। यद्यपि हमें अपने शहीदों पर गर्व और सम्मान है, लेकिन केवल नाम बदलने से इस क्षेत्र के लोगों को कोई लाभ नहीं होगा। इसके बजाय, हमें उनके नाम तथा सम्मान में उनके पैतृक स्थान/गांव में एक अस्पताल/मेडिकल कॉलेज या एक आईआईटी स्थापित करने के बारे में सोचना चाहिए, जो स्थानीय युवाओं को रक्षा बलों में शामिल होने के लिए प्रेरित करेगा। इससे रोजगार और व्यवसाय के अवसर खुलेंगे, जिससे सम्पूर्ण क्षेत्र का विकास होगा।"- ले.कर्नल बुद्धि बल्लभ ध्यानी
साथ ही उन्होंने स्थापित की गई महापुरुषों की मूर्तियों का उचित रखरखाव न किये जाने पर भी गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा है कि, सरकार महापुरुषों की मूर्तियाँ तो स्थापित कर देती है परन्तु उनका रख-रखाव के लिए कोई उचित आधार नहीं बनाती है। जैसे वृक्षारोपण के कार्यक्रमों में पौधे तो लगा दिए जाते हैं परन्तु उनका समग्र रख रखाव का ठोस प्रबंधन न होने के कारण पौधे कुछ ही दिन मर जाते हैं, फिर हमारी हमारी आस्थाएँ धरी की धरी रह जाती हैं ।
उन्होंने लैन्सडौन के निकट डेरियाखाल के तिराहे में स्व. लीला नन्द लखेडा की मूर्ति की ओर ध्यान आकृष्ट करते हुए कहा कि आज रख रखाव के आभाव में मूर्ति अपनी दुर्दशा स्वयं बयां कर रही है । लीला नन्द लखेड़ा की मूर्ति को पूर्व गौरव सेनानी विक्रांत खन्तवाल ने साफ़-सफ़ाई तो कर दी है परन्तु मूर्ति को उचित रखाव की आवश्यकता है।

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