सेवा संकल्प समारोह का हुआ समापन - TOURIST SANDESH

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रविवार, 18 अक्टूबर 2026

सेवा संकल्प समारोह का हुआ समापन

 सेवा संकल्प समारोह का हुआ समापन


देहरादून। शनिवार, दून विश्वविद्यालय के सीनेट हॉल में ‘सेवा संकल्प समारोह: राष्ट्रसेवा के 25 वर्षों का उत्सव’ का समापन हुआ। इस अवसर पर प्रतिष्ठित शिक्षाविदों और विश्वविद्यालय के प्रतिनिधियों ने एकत्र होकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की विकास यात्रा, सुशासन, महिला सशक्तीकरण, शिक्षा में परिवर्तन और वैश्विक स्तर पर भारत की बढ़ती प्रतिष्ठा जैसे विषयों पर विचार-विमर्श किया। कार्यक्रम में सेवा, संकल्प और राष्ट्रनिर्माण के आदर्शों को रेखांकित करते हुए एक प्रगतिशील एवं समतामूलक भारत के निर्माण में जनसेवा, समावेशी विकास और सामूहिक उत्तरदायित्व के महत्त्व पर बल दिया गया।

सभा को संबोधित करते हुए दून विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. सुरेखा डंगवाल ने नेतृत्व और शासन के बदलते आयामों पर अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने सादगी, आम नागरिकों से जुड़ाव तथा समाज के आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के कल्याण के प्रति प्रतिबद्धता के महत्त्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि यह सुनिश्चित करने के लिए जन-केंद्रित शासन और समावेशी विकास आवश्यक हैं कि प्रगति का लाभ समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुँचे। प्रो. डंगवाल ने विशेष रूप से महिला-नेतृत्व वाले विकास के महत्त्व को रेखांकित करते हुए कहा कि महिलाओं को केवल कल्याणकारी योजनाओं के लाभार्थी के रूप में देखने की सोच से आगे बढ़ने की आवश्यकता है। उन्हें निर्णय-निर्माण, सामाजिक परिवर्तन और राष्ट्रनिर्माण में सक्रिय भागीदार एवं नेतृत्वकर्ता के रूप में मान्यता दी जानी चाहिए। उन्होंने जनमत को आकार देने, नीतिगत पहलों को जनसामान्य तक पहुँचाने तथा नेतृत्व के प्रति जनधारणाओं को प्रभावित करने में पत्रकारिता और सोशल मीडिया की भूमिका पर भी प्रकाश डाला।

 उन्होंने शिक्षकों और शिक्षा क्षेत्र से जुड़े मुद्दों का भी उल्लेख किया तथा राष्ट्रीय प्रगति में शिक्षकों के योगदान को उचित मान्यता देने की आवश्यकता पर बल दिया। भारत के सभ्यतागत दर्शन ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ अर्थात् पूरा विश्व एक परिवार है, का उल्लेख करते हुए प्रो. डंगवाल ने वैश्विक सहयोग, शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व और साझा समृद्धि की प्रासंगिकता को रेखांकित किया। उनके संबोधन में राष्ट्रीय विकास की व्यापक दृष्टि को सामाजिक उत्तरदायित्व, शैक्षिक उन्नति, महिला सशक्तीकरण और वंचित समुदायों के कल्याण से जोड़ा गया। उन्होंने युवाओं को उभरते क्षेत्रों, उद्यमिता, तकनीकी प्रगति, अनुसंधान और सामाजिक विकास में योगदान देने के लिए सक्षम बनाने के महत्त्व पर बल दिया। भारत के युवाओं के लिए उपलब्ध अवसरों का उल्लेख करते हुए उन्होंने शैक्षिक पहलों और राष्ट्रीय प्राथमिकताओं को ठोस परिणामों में परिवर्तित करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

वीर माधो सिंह भंडारी उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय की कुलपति डॉ. तृप्ता ठाकुर ने भारत की समकालीन विकास यात्रा पर अपने विचार प्रस्तुत किए। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश की विकास यात्रा पर चर्चा के संदर्भ में वर्ष 2014 को एक महत्त्वपूर्ण पड़ाव बताया। विदेश यात्राओं के दौरान अपने अनुभवों को साझा करते हुए उन्होंने कहा कि विदेशी मंत्रियों सहित विभिन्न अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों ने भारत के नेतृत्व, नीतिगत प्राथमिकताओं और विश्व स्तर पर देश की बढ़ती भूमिका में रुचि व्यक्त की है।

उनके विचारों में भारत के प्रति बढ़ते अंतरराष्ट्रीय ध्यान तथा कूटनीतिक संवाद, विकास संबंधी प्राथमिकताओं और वैश्विक साझेदारियों के महत्त्व को रेखांकित किया गया। उन्होंने भारत की प्रगति को व्यापक अंतरराष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य में देखने की आवश्यकता पर बल दिया तथा घरेलू विकास, अंतरराष्ट्रीय पहचान और वैश्विक चुनौतियों के समाधान में रचनात्मक योगदान देने की देश की आकांक्षाओं के बीच संबंधों पर विचार व्यक्त किए।

उत्तराखंड के उच्च शिक्षा निदेशक डॉ. ए. एस. उनियाल ने युवाओं को भारत की सबसे बड़ी शक्तियों में से एक बताते हुए कहा कि उनकी ऊर्जा, रचनात्मकता और प्रतिबद्धता राष्ट्र के भविष्य के लिए अत्यंत महत्त्वपूर्ण हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करने, रचनात्मक संबंध स्थापित करने तथा आत्मविश्वास, धैर्य और दृढ़ संकल्प के साथ चुनौतियों का सामना करने के लिए प्रेरित किया। सकारात्मक और नकारात्मक प्रभावों के एक ढाँचे के माध्यम से अपने विचारों को स्पष्ट करते हुए डॉ. उनियाल ने विद्यार्थियों को इस बात पर विचार करने के लिए प्रोत्साहित किया कि उनके अनुभव, दृष्टिकोण और पारस्परिक व्यवहार किस प्रकार परिणामों को प्रभावित कर सकते हैं। विद्यार्थियों को अपनी आकांक्षाओं को सार्थक कार्यों में बदलने के लिए प्रेरित करते हुए उन्होंने शिक्षा को न केवल व्यक्तिगत उन्नति का अवसर, बल्कि राष्ट्र के विकास में योगदान देने का माध्यम भी बताया।

धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत करते हुए प्रो. एच. सी. पुरोहित ने एक प्रगतिशील, ज्ञानसम्पन्न और आत्मनिर्भर राष्ट्र के निर्माण में शिक्षा की निर्णायक भूमिका को रेखांकित किया। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 की परिकल्पना पर विचार व्यक्त करते हुए उन्होंने समग्र शिक्षा, बहुविषयक अध्ययन, कौशल विकास, नवाचार, अनुसंधान और व्यक्तिगत क्षमताओं के विकास पर इसके विशेष ध्यान को रेखांकित किया। प्रो. पुरोहित ने कहा कि शैक्षणिक संस्थानों का दायित्व विद्यार्थियों को केवल परीक्षाओं और रोजगार के लिए तैयार करना नहीं है, बल्कि उन्हें जिम्मेदार नागरिकता, आलोचनात्मक चिंतन और आजीवन सीखने के लिए भी सक्षम बनाना है। उन्होंने कार्यक्रम के सफल आयोजन में योगदान देने वाले सभी प्रतिष्ठित वक्ताओं, विश्वविद्यालय के नेतृत्व, संकाय सदस्यों, कर्मचारियों और प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया।

समापन संबोधन में डॉ. उनियाल ने उत्तराखंड के माननीय उच्च शिक्षा मंत्री का संदेश प्रस्तुत किया। उन्होंने युवाओं को सशक्त बनाने और शिक्षा तक उनकी पहुँच बढ़ाने के उद्देश्य से संचालित सरकारी पहलों को रेखांकित किया। इनमें उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा परिषद के माध्यम से हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की परीक्षाएँ उत्तीर्ण करने वाली पात्र छात्राओं के लिए आजीवन छात्रवृत्ति की व्यवस्था शामिल है, जिससे वे विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर सकें। यह पहल वित्तीय बाधाओं को कम करने, युवा प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने और उत्तराखंड के युवाओं के लिए अवसरों का विस्तार करने के प्रति राज्य सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

‘सेवा संकल्प समारोह’ का समापन समारोह नेतृत्व, सुशासन, शिक्षा, महिला सशक्तीकरण, युवाओं की भागीदारी और विश्व के साथ भारत के जुड़ाव जैसे विषयों पर विचार-विमर्श एवं संवाद का एक महत्त्वपूर्ण मंच बना। वक्ताओं ने सामूहिक रूप से इस बात पर बल दिया कि सतत राष्ट्रीय प्रगति सुदृढ़ शैक्षणिक संस्थानों, सशक्त नागरिकों, समान अवसरों तथा जनकल्याण और राष्ट्रनिर्माण के प्रति साझा प्रतिबद्धता पर आधारित होती है।

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