स्मृति, चेतना, चिकित्सीय उपयोग और नैतिकता के विभिन्न पहलुओं की समझ विकसित करना मनोविज्ञान का उद्देश्य: प्रो राकेश कुमार जैन - TOURIST SANDESH

Breaking

शुक्रवार, 25 सितंबर 2026

स्मृति, चेतना, चिकित्सीय उपयोग और नैतिकता के विभिन्न पहलुओं की समझ विकसित करना मनोविज्ञान का उद्देश्य: प्रो राकेश कुमार जैन

स्मृति, चेतना, चिकित्सीय उपयोग और नैतिकता के विभिन्न पहलुओं की समझ विकसित करना मनोविज्ञान का उद्देश्य : प्रो राकेश कुमार जैन



देहरादून। (शुक्रवार, 25 सितंबर 2026) दून विश्वविद्यालय के मनोविज्ञान विभाग द्वारा हिप्नोसिस और पास्ट लाइफ रिग्रेशन थेरेपी विषय पर दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है। इस कार्यशाला में पास्ट लाइफ रिग्रेशन थेरेपी की अवधारणा, इसके चिकित्सीय उपयोग, उपलब्ध साक्ष्य, स्मृति एवं चेतना से जुड़े मनोवैज्ञानिक पक्ष तथा नैतिक और पेशेवर पहलुओं पर विशेषज्ञ संवाद किया जा रहा है।

कार्यशाला के प्रमुख प्रशिक्षक  गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय के मनोविज्ञान विभाग के आचार्य प्रो. राकेश कुमार जैन ने मनोविज्ञान के विकास के विभिन्न आयाम पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने प्रतिभागियों के साथ पास्ट लाइफ रिग्रेशन से जुड़े विभिन्न मनोवैज्ञानिक एवं चिकित्सीय पहलुओं पर चर्चा की तथा इस विषय को समझने के लिए वैज्ञानिक दृष्टिकोण और आलोचनात्मक सोच के महत्व को रेखांकित किया। प्रोफेसर जैन ने कहा कि मनुष्य की सोच और विचार उसकी धारणा के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

कार्यशाला में विशेष रूप से इस बात पर चर्चा की जा रही है कि किसी व्यक्ति के अनुभव, स्मृतियां और उनसे जुड़ी भावनाएं उसके वर्तमान मनोवैज्ञानिक अनुभवों को किस प्रकार प्रभावित कर सकती हैं। इसके साथ ही स्मृति के पुनर्निर्माण, सुझावशीलता, कल्पना और अपेक्षाओं जैसे मनोवैज्ञानिक कारकों को समझने पर भी ध्यान दिया जा रहा है। 

इस अवसर पर दून विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. सुरेखा डंगवाल ने कहा कि विश्वविद्यालय में ऐसे अकादमिक कार्यक्रमों का उद्देश्य विद्यार्थियों को समकालीन विषयों से परिचित कराने के साथ-साथ उन्हें प्रश्न करने और विषयों को विभिन्न दृष्टिकोणों से समझने का अवसर देना और उनके सर्वांगीण विकास है। उन्होंने कहा कि मनोविज्ञान जैसे विषय में किसी भी चिकित्सीय पद्धति को समझते समय वैज्ञानिक दृष्टिकोण, मानवीय संवेदनशीलता और नैतिक जिम्मेदारी का संतुलन आवश्यक है।

स्कूल ऑफ सोशल साइंसेज के डीन प्रो. आर. पी. ममगाईं ने कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रम विद्यार्थियों को कक्षा की पढ़ाई से आगे बढ़कर नए और उभरते विषयों को समझने तथा उनके सामाजिक एवं मनोवैज्ञानिक पक्षों पर विचार करने का अवसर प्रदान करते हैं।

मनोविज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. राजेश भट्ट ने कहा कि कार्यशाला का उद्देश्य विद्यार्थियों को पास्ट लाइफ रिग्रेशन थेरेपी के बारे में जानकारी देने के साथ-साथ इसके चिकित्सीय दावों, उपलब्ध साक्ष्यों, सीमाओं और नैतिक पक्षों को समझने का अवसर प्रदान करना है। उन्होंने कहा कि मनोविज्ञान के विद्यार्थियों के लिए किसी भी उपचार पद्धति को वैज्ञानिक प्रमाण, पेशेवर मानकों और आलोचनात्मक दृष्टिकोण के साथ समझना आवश्यक है।

कार्यशाला में नैतिकता और पेशेवर अभ्यास पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। संवेदनशील व्यक्तिगत अनुभवों के साथ कार्य करते समय सूचित सहमति, गोपनीयता, पेशेवर सीमाएं तथा प्रतिभागी या क्लाइंट की सुरक्षा जैसे मुद्दों पर चर्चा की जा रही है। 

कार्यशाला में प्रो. एच. सी. पुरोहित, प्रो. अरुण कुमार, प्रो. हिमानी शर्मा, डॉ. चारु द्विवेदी, आबसर अब्बासी, देवेंदु रावत, विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के शिक्षक एवं अन्य गणमान्य लोग उपस्थित थे। 

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें