नाटक जय जवान जय जय हिन्दुस्तान का हुआ नाट्य मंचन
राष्ट्र भक्ति के लिए प्रेरित करता है नाटक जय जवान जय जय हिन्दुस्तान
कोटद्वार। (गुरुवार, 13 अगस्त) ब्रह्माण्डेव कुटुम्बकम् सेवा समिति, सूआसू योगसछ सेवा समिति और आयुष जोशी कॉमन सर्विस सेंटर, कण्वनगरी कोटद्वार के संयुक्त तत्वावधान में डॉ॰ सुन्दर लाल जोशी कृत नाटक जय जवान जय-जय हिन्दुस्तान एवं छ्वीं बैऽरा बुढ्या और बैऽरा बुढड़ी का मंचन किया गया। साथ ही डॉ॰ जोशी कृत 1000 मौलिक पहेलियों (गढ़वाली मैंणा) का भी अभिमंचित किया गया। इस अवसर पर कार्यक्रम के मुख्य अतिथि कै.(से.नि.) चण्डी प्रसाद डोबरियाल ने जय जवान जय- जय हिन्दुस्तान की उपादेयता पर अपने विचार रखते हुए कहा कि नाटक की जीवन्तता स्वयं उन्हें अपने सेवा काल के संघर्षपूर्ण और आत्म प्रेरणाप्रद घटनाक्रमों की याद दिला गई। विशिष्ट अतिथि प्रवेश नवानी ने इस प्रकार के सार्थक कार्यक्रमों को समाजोपयोगी बताया। विजय लखेड़ा ने अपने उद्बोधन में इस प्रकार के राष्ट्रीय एकता और अखण्डता पर आधारित कार्यक्रमों को जीवनोपयोगी बताया। प्रान्तीय सचिव, अखिल भारतीय पूर्व सैनिक सेवा परिषद चण्डी प्रसाद डोबरियाल ने इस प्रकार नाटकों के सृजन और मंचन के लिए डॉ॰ जोशी, विनोद ध्यानी, कमला जोशी, बबीता कुकरेती, अलका जोशी, आयुष जोशी का धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि सैनिकों के सम्मान में इस प्रकार का सकारात्मक कार्यक्रम आयोजित किया। कार्यक्रम में राजेन्द्र पन्त ने कहा कि छ्ंवी बैरा बुढ्या और बैरी बुढ्डी के एकांकी मंचन और 1000 से अधिक मौलिक गढ़वाली पहेलियों (मैंणा) के सृजन के लिए डॉ॰ जोशी को बधाई दिया जाना प्रासंगिक होगा।
साथ ही डॉ॰ जोशी एवं आयुष जोशी ने कार्यक्रम की सम्पन्नता पर कार्यक्रम में उपस्थित सभी महानुभावों का आभार प्रकटीकरण करते हुए कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रम न सिर्फ हमारे सैनिकों को कठिन संघर्षशील जीवन शैली को ही दर्शाते हैं बल्कि उनके अपने राष्ट्र के प्रति असीम प्रेम को भी दर्शाते हैं। सैनिकों और उनके अधिकारी वर्ग की राष्ट्रीय एकता और अखण्डता के प्रति जागृत सोच निश्चित रूप से राष्ट्रीय भावना से ओत प्रोत होती है। इन्हीं भावनाओं से आम जन मानस सहित जागरूक समाज को भी प्रेरणा लेनी चाहिए। कार्यक्रम में राजकीय आदर्श प्राथमिक विद्यालय सुखरौ के विद्यार्थियों द्वारा वंदना और लोक नृत्य भी प्रस्तुत किया गया।
कार्यक्रम के संयोजक कमला जोशी ने कार्यक्रम के सफल आयोजन में मोहित बलूनी एवं प्रियांक नौड़ियाल के विशिष्ट योगदान की भी चर्चा की। विनोद चन्द्र ध्यानी ने कार्यक्रम में उपस्थित सभी बुद्धिजीवियों को स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रमों को निरंतरता बनाए रखने के लिए सार्थक प्रयास किए जाने चाहिए।
कार्यक्रम में राजेन्द्र प्रसाद पंत, राकेश मोहन सुन्द्रियाल, जनार्दन प्रसाद ध्यानी, राम भरोसा कण्डवाल, गब्बर सिंह बिष्ट, उम्मेद कुमार, वन्दना बडोला, अलका जोशी, कमला जोशी, लक्ष्मी ध्यानी, एस डी गौड़, कै सी पी डोबरियाल, चन्द्र प्रकाश नैथानी, विजय लखेड़ा, महेशचन्द्र डोबरियाल, अरविन्द ध्यानी, कुलदीप सिंह, राकेश बड़थ्वाल, ओम प्रकाश बड़थ्वाल, बच्ची राम ध्यानी, राकेश कुमार देवरानी, पी सी नवानी, एस एन नौटियाल, चण्डी प्रसाद कुकरेती, अनूप जोशी, कल्पना तिवारी, रामस्वरूप धस्माना, रेनु रावत, सरिता देवी, गुरमीत, सिमरन, ललिता, माहि अनुष्टिका, वैष्णवी, संजना, अमृता, अंजू बिष्ट, शोभा भट्ट, बबीता कुकरेती, जे. बहुखण्डी आदि राष्ट्र प्रेमी साहित्यकार एवं समाजसेवी उपस्थित थे।

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