छात्रा की मौत के बाद छात्रों में भारी रोष
उपचार में लापरवाही तथा समय पर उपचार न मिलने का लगाया आरोप
पहाड़ों की स्वास्थ्य व्यवस्था पर फिर उठे सवाल
छात्रा की मौत का बहुत दुःख है। पूरा विश्वविद्यालय प्रशासन इस अनहोनी से स्तब्ध एवं दु:खी है। छात्रा के प्रति हमारी गहरी संवेदनाएं हैं। छात्रा को तुरन्त पाबौ स्वास्थ्य केन्द्र में ले जाया गया था, जहां से उसे जिला अस्पताल पौड़ी स्थानांतरित कर दिया गया, जिला अस्पताल पौड़ी ने छात्रा को बेस अस्पताल श्रीनगर गढ़वाल स्थानांतरित कर दिया तथा बेस अस्पताल ने छात्रा को एम्स ऋषिकेश भेज दिया। श्रीनगर से ऋषिकेश एम्स ले जाते समय छात्रा ने दम तोड़ दिया। पहाड़ों में स्वास्थ्य सेवाएं के अभाव में आकस्मिक स्थिति में विकट समस्या उत्पन्न हो जाती है। जिसके कारण कई बार अनहोनी का सामना करना पड़ता है। इस सम्बन्ध में विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा राज्य सरकार को पूर्व में भी कई बार सूचित किया जा चुका है।डॉ एस.पी. सती, रजिस्ट्रार, यूयूएचएफ
पौड़ी। वीर चंद्र सिंह गढ़वाली औद्यानिकी एवम वानिकी विश्वविद्यालय, भारसार स्नातक बी एस सी चतुर्थ वर्ष की छात्रा मधु यादव की मौत हो चुकी है। छात्रा पंतनगर की रहने वाली थी। प्रदर्शनकारी छात्रों ने बताया कि, उसकी 26 अगस्त से तबियत खराब हई थी परन्तु 29 अगस्त तक महाविद्यालय की तरफ से कोई भी सही उपचार न मिलने के कारण 30 अगस्त को छात्रा का देहांत हो गया। प्रदर्शनकारी छात्रों ने आरोप लगाया है कि विश्वविद्यालय की तरफ से कोई भी जिम्मेदारी सही से नहीं उठाई गई। जबकि समय-समय पर छात्रावास प्रभारी की खबर दी जा रही थी परिसर में जब से महाविद्यालय बना है तब से एक भी चिकित्सक उपलब्ध नहीं है, जबकि हर वर्ष बच्चो की तबियत खराब होती रही है। उसकी 29 अगस्त को सांय 7:00 बजे तबियत ज्यादा खराब हुई जिस कारण उसे भरसार की औषधालय से पाबौ अस्पताल भेजा गया, जबकि भरसार के चिकित्सक, शंकर बिष्ट एवं अधिष्ठाता को जानकारी थी कि पाबौ में चिकित्सक उपलब्ध नहीं है फिर भी मधु यादव को पाबौ अस्पताल भेजा गया। पाबौ से पौड़ी तथा पौड़ी से श्रीनगर और वहां से ऋषिकेश एम्स में भेजा गया। जिसके कारण मधु यादव को समय पर उपचार नहीं मिल पाया। उपचार में हुई देरी के कारण छात्रा की मौत हुई है। इसके लिए काॅलेज प्रशासन जिम्मेदार है।

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