मधुशाला
सुभाष चन्द्र नौटियाल
शिक्षा मन्दिरों पर पड़ा ताला, गली-गली खुली मधुशाला।
रीति बनी, प्रीति हुई,
गांव-गांव पहुंची मधुशाला।
अनुशासन का जिनसे पाठ पढ़ा,
ध्वस्त हुए शिक्षा के वे मन्दिर।
रह गयी अब केवल मधुशाला,
मधु पीकर उन्मद हुआ मानव,
भूल गया सब अनुशासन।
नीति-रीति, संस्कृति बनी मधुशाला,
कौन-कब-कहां-कैसे,
खोज रहे हैं सब प्याला।
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