मधुशाला - TOURIST SANDESH

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बुधवार, 27 मई 2026

मधुशाला

 मधुशाला 

 सुभाष चन्द्र नौटियाल

शिक्षा मन्दिरों पर पड़ा ताला, गली-गली खुली मधुशाला।

रीति बनी, प्रीति हुई,

 गांव-गांव पहुंची मधुशाला।

अनुशासन का जिनसे पाठ पढ़ा,

ध्वस्त हुए शिक्षा के वे मन्दिर।

 रह गयी अब केवल मधुशाला,

मधु पीकर उन्मद हुआ मानव,

भूल गया सब अनुशासन।

नीति-रीति, संस्कृति बनी मधुशाला,

कौन-कब-कहां-कैसे, 

खोज रहे हैं सब प्याला।


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