गौरा देवी स्मारक राष्ट्रीय वाद-विवाद प्रतियोगिता का हुआ आयोजन - TOURIST SANDESH

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रविवार, 26 अप्रैल 2026

गौरा देवी स्मारक राष्ट्रीय वाद-विवाद प्रतियोगिता का हुआ आयोजन

 गौरा देवी स्मारक राष्ट्रीय वाद-विवाद प्रतियोगिता का हुआ आयोजन 

देहरादून। दून विश्वविद्यालय की साहित्यिक और वाद-विवाद समिति  वात्सल्य ने शनिवार को 'गौरा देवी स्मारक राष्ट्रीय वाद-विवाद प्रतियोगिता' के चौथे संरकरण का आयोजन किया। इस प्रतियोगिता का आयोजन "नारी शक्ति वंदन अधिनियम (2023) एक समावेशी और प्रगतिशील 'विकसित भारत' के निर्माण में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है" विषय के अंतर्गत किया गया। भारत के अन्संय स्थानों से प्रतिनिधि भी इस आयोजन में शामिल हुए।

इनमें प्रमुख रूप से इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (नई दिल्ली), ICAR-IVRI विश्वविद्यालय (बरेली, UP), रामजस कॉलेज (दिल्ली विश्वविद्यालय, दिल्ली), मोतीलाल नेहरू कॉलेज (नई दिल्ली), और उत्तराखंड के विभिन्न विश्वविद्यालय और कॉलेज शामिल थे।

  प्रतियोगिता में प्रत्येक टीम में दो वक्ता शामिल थे, जिन्होंने हिंदी तथा अंग्रेजी दोनों भाषाओं में प्रस्ताव के पक्ष और विपक्ष में अपने तर्क प्रस्तुत किए। प्रतियोगिता का मुख्य विषय 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम (2023)' था-एक ऐसा संवैधानिक संशोधन जो लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण का प्रावधान करता है। यह कानून हाल के दशकों में भारत के प्रतिनिधि लोकतंत्र में किए गए सबसे महत्वपूर्ण संरचनात्मक हस्तक्षेपों में से एक है l 

इस कार्यक्रम का शुभारंभ SOL की डीन डॉ. चेतना पोखरियाल द्वारा 'दीप प्रज्वलन' के साथ किया गया। 

प्रतियोगिता में प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले प्रतिभागियों को क्रमशः 11,000/-, 7,500/- और 5,000/- की नकद पुरस्कार राशि से सम्मानित किया गया। अंग्रेजी श्रेणी के परिणाम इस प्रकार रहे - प्रथम स्थान -शिव्या (दून विश्वविद्यालय); द्वितीय स्थान संजना गुप्ता (DIT विश्वविद्यालय); तृतीय स्थान राजश्री (दून विश्वविद्यालय)। हिंदी श्रेणी के परिणाम - प्रथम स्थान आरव शर्मा (दून विश्वविद्यालय); द्वितीय स्थान - संस्कृति दशमाना (दून विश्वविद्यालय); तृतीय स्थान हिमानी पाल (DAV PG कॉलेज)। 'सर्वश्रेष्ठ टीम' का पुरस्कार DAV PG कॉलेज, देहरादून ने प्राप्त किया।

जजों के  पैनल में सुश्री कमला पंत (सेवानिवृत्त उप निदेशक, स्कूली शिक्षा, उत्तराखंड), डॉ. देवेंद्र बुडाकोटी (फ्रीलांस कंसल्टेंट), अजय जुगरान (वकील और लेखक), और सुश्री दीपांजलि राठौर (निदेशक, Learn Tastic, और मानद, सचिव, वन्यजीव संरक्षण समिति) शामिल थे।

कुलपति सुरेखा डंगवाल ने दिवंगत गौरा देवी को श्रद्धांजलि देते हुए संसद में महिलाओं के कम प्रतिनिधित्व पर प्रकाश डाला।

 उन्होंने महिलाओं को नेतृत्व की भूमिकाओं के माध्यम से सशक्त बनाने की आवश्यकता पर ज़ोर दिया। मुख्य अतिथि प्रो. देवेंद्र भसीन (उपाध्यक्ष, राज्य उच्च शिक्षा परिषद, उत्तराखंड) ने अपने संबोधन में कहा कि, जब महिलाएं सशक्त होती हैं, तो वे न केवल व्यक्तिगत रूप से आगे बढ़ती है, बल्कि राष्ट्र के व्यापक विकास में भी योगदान देती हैं। 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' जैसी पहलों का ज़िक्र करते हुए, उन्होंने इस बात की पुष्टि की कि महिलाओं में निवेश करने की राजनीतिक इच्छाशक्ति मौजूद है, लेकिन इसके साथ-साथ ढांचागत बदलाव भी ज़रूरी हैं। कार्यक्रम दुर्गेश डिमरी, (रजिस्ट्रार), प्रो. हर्ष डोभाल (अंबेडकर पीठ), डॉ. राजीव, डॉ. राजेश भट्ट, डॉ. अदिति बिष्ट, डॉ. आबशार अब्बासी और छात्र संघ अध्यक्ष अंशुमान उपस्थित थे। धन्यवाद ज्ञापन सुश्री आकांक्षा भट्ट (संयोजक, वात्सल्य) ने दिया। कार्यक्रम को सह-संयोजक सुश्री आस्था कोठारी, 'वात्सल्य' टीम के सहयोग से सफल बनाया गया।

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