दीक्षा समारोह एवं पुस्तक मेले का हुआ आयोजन - TOURIST SANDESH

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शुक्रवार, 24 अप्रैल 2026

दीक्षा समारोह एवं पुस्तक मेले का हुआ आयोजन

दीक्षा समारोह एवं पुस्तक मेले का हुआ आयोजन 

कोटद्वार। उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय (UOU) के अध्ययन केंद्र, राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, कोटद्वार (कोड: 12042) में आज एक भव्य इंडक्शन प्रोग्राम (दीक्षा समारोह) का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम केंद्र के प्राचार्य की अध्यक्षता में संपन्न हुआ, जिसका मुख्य उद्देश्य नए प्रवेश लेने वाले छात्रों को विश्वविद्यालय की कार्यप्रणाली और शैक्षणिक गतिविधियों से परिचित कराना था।

कार्यक्रम का संचालन, अध्ययन केंद्र के सहायक समन्वयक डॉ. कपिल थपलियाल ने किया। इस दौरान केंद्र की समन्वयक प्रोफेसर राखी डिमरी ने छात्रों का मार्गदर्शन करते हुए उन्हें विश्वविद्यालय के नियमों और अकादमिक कैलेंडर की विस्तृत जानकारी दी। प्रोफेसर डिमरी ने छात्रों को ऑनलाइन असाइनमेंट जमा करने की प्रक्रिया, परीक्षा पैटर्न, काउंसलिंग सत्रों की महत्ता और प्रवेश प्रक्रिया के विभिन्न चरणों के बारे में विस्तार से समझाया।

उन्होंने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि, "मुक्त शिक्षा प्रणाली में स्वयं-अध्ययन के साथ-साथ तकनीकी जानकारी का होना अत्यंत आवश्यक है। यह इंडक्शन प्रोग्राम छात्रों को इन सब विषयों में स्पष्टता प्रदान करने के लिए आयोजित किया गया है।"

पुस्तक मेले का भी हुआ आयोजन

इंडक्शन प्रोग्राम के उपरांत, अध्ययन केंद्र परिसर में एक 'पुस्तक मेला' आयोजित किया गया। इस मेले के माध्यम से विद्यार्थियों को उनके पाठ्यक्रम से संबंधित आवश्यक पुस्तकें वितरित की गईं, ताकि वे समय रहते अपनी आगामी पढ़ाई की तैयारी शुरू कर सकें। छात्रों ने इस पहल की सराहना की और उत्साह के साथ पुस्तकें प्राप्त कीं।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्राचार्य ने छात्रों को बधाई दी और उन्हें निरंतर अध्ययन के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि अध्ययन केंद्र छात्रों की सहायता के लिए हमेशा तत्पर है और किसी भी प्रकार की शैक्षणिक समस्या के समाधान के लिए विद्यार्थी कभी भी केंद्र से संपर्क कर सकते हैं।

इस अवसर पर डॉ. संदीप किमोठी, डॉ. अनुपम कोठारी  सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे। 

कार्यक्रम के आयोजन में उमेश खुगशाल, संदीप चौहान, कुलदीप रावत और कमलेश कुमार का सराहनीय सहयोग रहा। कार्यक्रम का समापन छात्रों के प्रश्नों के उत्तर देने और उनके संशयों के निराकरण के साथ हुआ।

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