मुझे भी लिफ्ट करो दो, एक बाबा दिला दो - TOURIST SANDESH

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बुधवार, 4 फ़रवरी 2026

मुझे भी लिफ्ट करो दो, एक बाबा दिला दो

 व्यंग्य 

मुझे भी लिफ्ट करो दो, एक बाबा दिला दो

सुभाष चन्द्र नौटियाल 

जब से मैंने सुना है कि, कण्वनगरी कोटद्वार में एक युवा को एक बाबा ने रातोंरात जग प्रसिद्धि दिला दी है। तब से मैं भी एक बाबा की खोज में निकल पड़ा हूं। शायद कोई बाबा आये और मुझे भी जग प्रसिद्धि दिला दे। कल कोटद्वार बाजार में, मैं नेताओं, अभिनेताओं, व्यापारियों, पूर्व सैनिकों, युवाओं, भद्र महिलाओं, शिक्षकों तथा पत्रकारों मित्रों सभी से निवेदन कर रहा था। थोड़ा सा लिफ्ट करा दो, एक बाबा के दर्शन ही करा दो। सब मेरी बात पर हल्की सी मुस्कान के साथ अपनी मंजिल की ओर बढ़ चले जा रहे थे। मैं समझ ही नहीं पा रहा था कि, आखिर माजरा क्या है? 

इस समय जबकि सारा संसार बाबामय हुआ जा रहा है फिर भी हमारी बल्द बुद्धि कठियावाड़ी घोड़े की तरह टाप से मिट्टी खोद कर कण्वनगरी में बाबाओं के चक्कर लगाकर फिर वहीं पर लौट कर आजा रही है। समझ ही नहीं आ रहा है बाबा से बाबा कब हुए थे? शायद, कण्वनगरी कोटद्वार पर यही ऋषि दुर्वासा के शाप का प्रभाव है, जो हमें कुछ समझने से पहले ही भ्रमित कर फिर से वहीं खड़ा कर देता है। हम हर बार ठगे सी रह जाते हैं और लोग कण्वाश्रम से जलेबी, पकौड़ी खाकर घर पहुंच जाते हैं।

जब तक हम कुछ समझ पाते हैं तब तक बाबा ने बाबा के द्वारा बाबा के लिए बाबा से ही बबाल करवा दिया जाता है और आमजन को बाबा से फिर बाबा बना दिया जाता है। हम ठहरे अनजान सी नासमझ, कम अक्ल, कुछ समझ ही नहीं आता कब, क्या, कहां, क्यों, कैसे हो जाता है। समझ ही नहीं आता। सांप निकल जाता है और हम आमजन लकीर पीटते रह जाते हैं, केंचुली तक भी हाथ नहीं आती। 

बहरहाल एक बाबा की खोज जारी है, यदि हो सके तो आप भी अपने लिए एक-एक बाबा खोज लें ताकि प्रसिद्धि का प्रसाद पा सको।

2 टिप्‍पणियां:

  1. कभी अपना व्यंग्य बाबाओ से हटकर मदरसा वाले मौलवियों और धर्मपरिवर्तन करने वाले फर्जी पादरियों की ओर भी डाल कर देखिए।

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    1. हम तो बल्द बुद्धि, कम अक्ल लोग हैं साहब, इसलिए शेष कार्य आपके भरोसे छोड़ दिया है। अब आप ही कुछ कर सकते हैं।

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