संस्कृत लघु प्रश्नोत्तरी एवं संस्कृत श्लोकोच्चारण प्रतियोगिताओं का हुआ आयोजन - TOURIST SANDESH

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शनिवार, 18 अप्रैल 2026

संस्कृत लघु प्रश्नोत्तरी एवं संस्कृत श्लोकोच्चारण प्रतियोगिताओं का हुआ आयोजन

 संस्कृत लघु प्रश्नोत्तरी एवं संस्कृत श्लोकोच्चारण प्रतियोगिताओं का हुआ आयोजन

कोटद्वार। डॉ पीतांबर दत्त बडथ्वाल हिमालयन राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय कोटद्वार में संस्कृत विभागीय परिषद तथा आइक्यूएसी के संयुक्त तत्वावधान में शुक्रवार को संस्कृत लघु प्रश्नोत्तरी एवं संस्कृत श्लोकोच्चारण प्रतियोगिताओं का आयोजन मुख्य अतिथि प्राचार्य, प्रो. डी. एस. नेगी की अध्यक्षता में संपन्न किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ मां शारदा की प्रतिमा पर दीप प्रज्ज्वलन एवं पुष्प अर्पण से हुआ। संस्कृत विभाग द्वारा छात्र छात्राओं के सर्वांगीण विकास हेतु प्रतिवर्ष आयोजित प्रतियोगिताओं का उद्देश्य सामाजिक सद्भाव और संप्रेषण कौशल को विकसित करना है। जो उन्हें भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करती हैं।

संस्कृत श्लोकोच्चारण प्रतियोगिता में दिव्यांशी बी. ए. चतुर्थ सेम, सोनिया बी. ए. द्वितीय सेम, अनुष्का एम. ए. द्वितीय सेम ने क्रमश: प्रथम, द्वितीय, तृतीय तथा अंशिका बी. ए. द्वितीय सेम ने सांत्वना पुरस्कार प्राप्त किया तथा संस्कृत लघु प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता में दिव्यांशी बी. ए. चतुर्थ सेम ने प्रथम, स्वाति कंडवाल एम. ए. चतुर्थ सेम. व नेहा सैनी बी. ए.षष्ठ सेम ने द्वितीय तथा शिवांगी बी. ए. द्वितीय सेम ने तृतीय एवं सोनिया बी. ए. द्वितीय सेम ने सांत्वना स्थान प्राप्त किया। विजयी प्रतिभागियों को प्राचार्य द्वारा पुरस्कृत किया गया जिसमे पूर्व सत्र के विजयी छात्र भी सम्मिलित थे ।अपने उद्बोधन में प्राचार्य ने छात्र-छात्राओं को बताया कि, कार्य के दो पहलू विजय -पराजय है लेकिन प्रतिभाग करना हमारा दायित्व है। प्रतिभाग करने से ही छात्र-छात्राओं का सर्वांगीण विकास संभव है । महाविद्यालय के विभागों में आयोजित होने वाली इन शैक्षणिक गतिविधियां का उद्देश्य छात्र-छात्राओं में आत्मविश्वास, नेतृत्व और विषयगत ज्ञान का विकास करना है।

डॉ अरूणिमा संस्कृत विभाग प्रभारी तथा डॉ प्रियम अग्रवाल ने सभी छात्र छात्राओं का उत्साहवर्धन कर कहा कि निरंतर ऐसी प्रतियोगिता में प्रतिभाग करने से नई ऊर्जा प्राप्त होती है । डॉ रोशनी असवाल ने कहा कि संस्कृत भाषा के संरक्षण और संवर्धन के लिए कक्षा शिक्षण के अतिरिक्त ऐसी प्रतियोगिताएं होना आवश्यक है क्योंकि ऐसी प्रतियोगिताओं के माध्यम से ही बच्चे संस्कृत संभाषण करना सीखते हैं। 

डॉ मनोरथ प्रसाद नौगांई द्वारा कार्यक्रम का संचालन किया।

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