नाथ सम्प्रदाय - भारतीय आध्यात्मिक परम्परा की धारा
सुभाष चन्द्र नौटियाल
नाथ सम्प्रदाय भारतीय आध्यात्मिक परम्परा की एक अत्यन्त प्राचीन, रहस्यमयी और प्रभावशाली धारा है। नाथ सम्प्रदाय की धारा योग, तंत्र, सिद्ध परम्परा और लोकधर्म—चारों को जोड़ता हुआ दिखाई देता है। नाथ सम्प्रदाय मूलतः योगमार्ग पर आधारित साधना परम्परा है। इसे योगियों का सम्प्रदाय भी कहा जाता है। इस परम्परा में हठयोग, कुण्डलिनी योग, तंत्र साधना और शिवोपासना का विशेष महत्व है। नाथ सम्प्रदाय— शिव से आरम्भ होकर योग से गुजरता हुआ, लोक और जीवन से जुड़ता है। यह केवल संन्यास नहीं, बल्कि जीवन को योगमय बनाने की परम्परा है।
दार्शनिक आधार
1. शैव दर्शन
2. तांत्रिक परम्परा
3. बौद्ध सिद्ध परम्परा (विशेषकर वज्रयान)
नाथ सम्प्रदाय के गुरु
आदिनाथ ( भगवान शिव)
मत्स्येन्द्रनाथ
गोरखनाथ
चर्पटनाथ
चौरंगीनाथ
नागार्जुननाथ
कन्थड़नाथ
जालंधरनाथ
भर्तृहरिनाथ
मत्स्येन्द्रनाथ आदि
इस परम्परा में हठयोग, कुण्डलिनी योग, तंत्र साधना और शिवोपासना का विशेष महत्व है।
गुरु गोरखनाथ, नाथ सम्प्रदाय को व्यापक पहचान और जनाधार देने वाले गुरु रहे हैं। इनका काल: खण्ड लगभग 9वीं से 12वीं शताब्दी के बीच माना जाता है।
गुरु गोरखनाथ ने हठयोग को व्यवस्थित रूप दिया तथा साधना को लोकभाषा और लोकजीवन से जोड़ कर नाथ सम्प्रदाय को व्यापकता प्रदान की। गुरु गोरखनाथ ने जाति, कर्मकाण्ड और बाह्य आडम्बरों का बहुत विरोध किया तथा लोक जीवन को सरल, सहज बनाने के लिए शिक्षाएं दी।
गुरु गोरखनाथ द्वारा रचित प्रसिद्ध ग्रन्थ
1. गोरखशतक
2. सिद्ध-सिद्धान्त पद्धति
3. योगमार्तण्ड
गुरु गोरखनाथ के कारण ही नाथ सम्प्रदाय पूरे उत्तर भारत, नेपाल, तिब्बत और बंगाल तक विस्तारित हुआ था।
नाथ सम्प्रदाय की प्रमुख विशेषताएँ
1. योग प्रधान साधना
क. हठयोग
ख. प्राणायाम
ग. मुद्रा, बन्ध
घ. कुण्डलिनी जागरण
2. सहज जीवन
गृहस्थ और संन्यासी—दोनों मार्ग स्वीकार परन्तु भिक्षा, अल्पाहार, आत्मसंयम जीवन का आधार
3. सामाजिक दृष्टि- जाति भेद का विरोध, कर्मकाण्ड से मुक्ति
4. अनुभव को शास्त्र से ऊपर स्थान
नाथ सम्प्रदाय और भक्ति आन्दोलन
नाथ सिद्धों का प्रभाव कबीर, दादू, रैदास जैसे संतों पर स्पष्ट दिखाई देता है।
निर्गुण भक्ति
योग और भक्ति का समन्वय
लोकभाषा में आध्यात्मिक शिक्षा, नाथ सम्प्रदाय और लोकसंस्कृति
उत्तर भारत में जागर, गाथा, लोककथा
नेपाल और हिमालयी क्षेत्रों में नाथ योगियों की विशेष प्रतिष्ठा है, गुरु गोरखनाथ को लोकदेवता के रूप में भी पूजा जाता है
गोरखपुर में गोरखनाथ मठ प्रसिद्ध पीठ है।
राजस्थान, हिमाचल, उत्तराखण्ड, नेपाल
योग और साधना केन्द्रों के रूप में स्थापित हैं।
नाथ सम्प्रदाय— शिव से आरम्भ होकर
योग से गुजरता हुआ, लोक और जीवन से जुड़ता है। यह केवल संन्यास नहीं, बल्कि जीवन को योगमय बनाने की परम्परा है।
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