भैर झकाझक उजळु, भितर गैरु अंधकार
अन्तर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस पर सामाजिक, सांस्कृतिक एवं साहित्यिक संस्था गढ़भारती ने आयोजित किया कार्यक्रम
देहरादून। अन्तर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के अवसर पर उत्तराखंड के संस्कृति विभाग के प्रेक्षागृह में गढ़वाली की नई धारा अर चेतना पर कवियों ने अपना कविता पाठ किया। कवियों ने कविता के माध्यम से मातृभाषा दिवस पर मातृभाषा की भाषाई विरासत को बचाने पर जोर दिया।
इस अवसर पर बीना कण्डारी, शान्ति प्रसाद जिज्ञासू, दिनेश डबराल, प्रेमलता सजवाण, शिवदयाल शैलज, विनीता मैठाणी, अंजना कण्डवाल, रक्षा बौड़ाई, प्रिया देवली तथा आइशा मेहर ने अपनी स्वरचित कविता पाठ कर सबका मन मोह लिया। लोक साहित्यकार लोकेश नवानी की अध्यक्षता में आयोजित इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि उद्योगपति सुशील कुमार थे।
लोक साहित्यकार लोकेश नवानी ने कहा कि, मातृभाषा ही है स्वर्ग का साधन है। मुख्य अतिथि ने कहा कि, मातृभाषा के संरक्षण के लिए कार्य करने की आवश्यकता है तथा खुशी की बात है कि वर्तमान में पीढ़ी इससे जुड़ रही है।
इस अवसर पर विमला रावत, विश्व भारती, शोभा रतूड़ी, विमला रावत, विनीता मैठाणी, किरन डोभाल, कमला डिमरी, प्रिया देवली, मधुर बाधनी, विजय जुयाल, डी.सी. नौटियाल आदि शामिल थे।
कार्यक्रम के आयोजक शान्ति प्रकाश जिज्ञासू, लक्ष्मण सिंह रावत, प्रेम लता सजवाण, शिवदयाल शैलज, रक्षा बौड़ाई आदि थे।
https://youtu.be/z_Patxprpec

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें