महाराज का इनकार,खण्डूडी का इकरार, बन पायेगें कांग्रेस के खेवनहार......?
लोकसभा चुनावी शंखनाद के साथ ही सत्ता की बिसात बिछ चुकी है। चुनावी महारथी बिलों से बाहर निकल कर सत्ता के योजनाकारों के चौखट पर राग दरबारी गाने को बेताब नजर आ रहे हैं तथा पिछली बार जो कमी रह गयी थी उसे पूरा करने का भरोसा भी दिला रहे हैं। जनता का क्या जनता तो सिर्फ मतदान तक ही सीमित रहती है।दल-बदल और बदल दल का खेल तो हर चुनावों की पहचान बन चुका है। कभी राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने सिद्धान्तविहीन राजनीति को पाप की श्रेणी रखा था परन्तु शायद यही पाप अब भारतीय लोकतन्त्र की नियति बन चुका है। पौड़ी लोकसभा सीट एक बार पुनः चर्चा का केन्द्र बनने जा रही है। दसकों से भाजपा के ध्वजवाहक पूर्व मुख्यमंत्री मेजर जनरल भुवन चन्द्र खण्डूड़ी के पुत्र मनीष खण्डूड़ी अब पौड़ी लोकसभा सीट से कांग्रेस के खेवनहार होंगे। कांग्रेस के पास पौड़ी सीट से मजबूत प्रत्याशी न होने तथा सैनिक वोटों का भाजपा के पक्ष में ध्रुवीकरण होने से बचाने के लिए कांग्रेस प्लान बी के तहत यह दांव खेल सकती है। सैनिक बहुलता वाली पौड़ी लोकसभा सीट से कांग्रेस को भी सैनिक पृष्ठभूमि वाले दमदार प्रत्याशी की दरकार है। वैसे तो प्लान ए के तहत कर्नल अजय कोठियाल को चुनाव लड़ाया जा सकता है परन्तु यदि कर्नल कोठियाल भाजपा से प्रत्याशी बनते हैं तो मनीष पर दांव खेला जा सकता है। मनीष खण्डूड़ी विगत एक सप्ताह से कांग्रेस के सम्पर्क में हैं। ऐसी स्थिति में देखना दिलचस्प होगा जबकि सतपाल महाराज कांग्रेस में वापसी से इनकार कर चुके हैं तो क्या मनीष खण्डूड़ी कांग्रेस के खेवनहार बन पायेगें?
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