स्मृति शेष.....
राष्ट्र निष्ठा के एक युग का अंत
सुभाष चन्द्र नौटियाल
देहरादून। मेजर जनरल (सेनि.) एवीएसएम, उत्तराखण्ड के पूर्व मुख्यमंत्री एवं केन्द्रीय मंत्री भुवन चंद्र खंडूड़ी के चले जाने के बाद राष्ट्रनिष्ठा के एक युग का अंत हो चुका है। उनके निधन से राजनीतिक, सामाजिक क्षेत्रों तथा आमजन में शोक की लहर दौड़ गयी। मुख्यमंत्री पुष्कर धामी सहित राजनीति से जुड़े सभी नेताओं ने उनके निधन पर गहरी संवेदना व्यक्त की है। लम्बी बीमारी के बाद मंगलवार को उन्होंने एक निजी अस्पताल में पौने ग्यारह बजे के आस-पास अन्तिम सांस ली। उनके चले जाने से देश एवं उत्तराखण्ड की अपूर्णीय क्षति हुई है। सेना में उच्च पद पर रहते हुए पहले देश सेवा की तथा सेवानिवृत्ति के बाद राजनीति के माध्यम से देश सेवा का रास्ता चुना। भारतीय सेना में रहते हुए उन्होंने तीन लड़ाइयां लड़ी। सेना में रहते हुए उन्होंने अनेक सेवा मेडल हासिल किए।
उन्हें राजनीति में सादगी, ईमानदारी, सुचिता एवं शुद्धिता के लिए हमेशा याद किया जायेगा। अटल बिहारी वाजपेई के नेतृत्व में गठित सरकार में केन्द्रीय मंत्री रहते हुए स्वर्णिम चतुर्भुज योजना हो या उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री काल में भ्रष्टाचार पर प्रहार करने के लिए लाया गया लोकपाल विधेयक हो खण्डूड़ी सदैव अनुशासित, निर्भीक, कर्मठ, कर्तव्यनिष्ठ एवं फैसलों में अडिग निर्णयों के लिए इतिहास में सदैव दर्ज रहेंगे।
मेजर जनरल (सेनि.) भुवन चंद्र खंडूड़ी का जन्म 1 अक्टूबर 1934 को संयुक्त प्रान्त, देहरादून में हुआ था। ब्रिटिशकाल में देहरादून संयुक्त प्रान्त का हिस्सा था। उनके पिता जय बल्लभ खंडूड़ी, एक पत्रकार तथा मां दुर्गा देवी खंडूड़ी, एक समर्पित सामाजिक कार्यकत्री थी। कुशाग्र बुद्धि के खण्डूड़ी ने सन् 1954 में इंजीनियरिंग में स्नातक करने के बाद भारतीय सेना की कार्प्स आफ इंजीनियर्स में कमीशन प्राप्त किया। सन् 1983 में, उन्हें भारतीय सेना में उनके असाधारण योगदान के लिए भारत के राष्ट्रपति से अति विशिष्ट सेवा पदक मिला। सन् 1991 में आप ने भारतीय सेना से सेवानिवृत्ति ली तथा सेवानिवृत्ति के पश्चात राजनीति में प्रवेश किया। सन् 1991 में प्रथम बार गढ़वाल लोकसभा का प्रतिनिधित्व किया। आपने लोकसभा में पांच बार गढ़वाल लोकसभा का प्रतिनिधित्व किया। वे अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार में 2000 से 2003 तक सड़क परिवहन एवं भूतल राजमार्ग मंत्रालय के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार के साथ) थे । उन्हें 2003 में कैबिनेट रैंक में पदोन्नत किया गया था, और मई 2004 में एनडीए सरकार के कार्यकाल के अंत तक इस पद पर रहे। एक मंत्री के रूप में, उन्होंने राष्ट्रीय राजमार्ग विकास परियोजना को लागू किया। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय में, उन्होंने एनडीए सरकार की महत्वाकांक्षी योजना राष्ट्रीय राजमार्ग विकास योजना को क्रियान्वित किया और प्रमुख भारतीय शहरों और उत्तर-दक्षिण और पूर्व-पश्चिम कॉरिडोर परियोजना को जोड़ने वाली स्वर्णिम चतुर्भुज परियोजना को आकार दिया। 2007 में उन्होंने उत्तराखण्ड विधानसभा चुनावों में अपनी पार्टी के लिए जीत का आधार तैयार किया। वे दो बार उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री रहे। प्रथम बार 08 मार्च 2007 को उन्होंने उत्तराखण्ड के चौथे मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। मुख्यमंत्री के पद पर वे 23 जून 2009 तक रहे तथा पुनः दूसरी बार 11 सितंबर 2011 से 13 मार्च 2012 तक वे उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री रहे। वर्ष 2012 में वे कोटद्वार सीट से विधानसभा का चुनाव हार गये थे। वर्ष 2014 से 2019 उन्होंने एक बार पुनः गढ़वाल लोकसभा का प्रतिनिधित्व किया। भुवन चंद खंडूड़ी के जीवन को देखा जाए, तो यह केवल एक नेता की कहानी नहीं, बल्कि ईमानदारी, अनुशासन और सेवा भाव का प्रतीक रहे है। उन्होंने उत्तराखंड की राजनीति को एक अलग दिशा दी और सुशासन का एक मानक स्थापित किया। आज जब वे हमारे मध्य नहीं रहे, तो पूरा उत्तराखंड उनके योगदान को याद कर रहा है। उनका राजनीतिक जीवन आने वाली पीढ़ियों के लिए एक प्रेरणा बना रहेगा। उत्तराखंड की राजनीति में भुवन चंद खंडूड़ी का नाम हमेशा सम्मान के साथ लिया जाएगा। उनकी नीतियां, उनका अनुशासन और उनकी ईमानदारी उन्हें एक अलग पहचान देते हुए आने वाली पीढ़ियों का मार्गदर्शन करेगी।
अपने कड़क मिजाज तथा ईमानदार छवि के लिए जाने जाने वाले मेजर जनरल बी.सी. खंडूड़ी की अमिट उपलब्धियां उनकी याद को उन्हें सदैव चिरस्थाई बनाये रखेगी। आज राष्ट्र निष्ठा के एक युग का अंत हुआ है, जिसकी कमी हमेशा महसूस की जायेगी तथा जीवन की प्रेरणा आने वाली पीढ़ियों का मार्गदर्शन करेगी।

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