लोक संस्कृति के बिखरे रंग - TOURIST SANDESH

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गुरुवार, 14 मई 2026

लोक संस्कृति के बिखरे रंग

 लोक संस्कृति के बिखरे रंग 


कोटद्वार। (टूरिस्ट संदेश, 10 मई, रविवार) राइजिंग उत्तराखंड फोरम द्वारा लोक भाषा विरासत के संरक्षण और संवर्धन के लिए भाषा विमर्श और लोक सांस्कृतिक कार्यक्रम  का आयोजन किया गया। आयोजन में लोक संस्कृति की मनमोहक प्रस्तुतियों द्वारा अनेक साहित्यिक एवं सांस्कृतिक रंग बिखरे।

फोरम के संयोजक डॉ  राकेश मोहन ध्यानी ने बताया कि राइजिंग उत्तराखण्ड का उद्देश्य अपनी सांस्कृतिक विरासत एवं पहचान को आमजन से रूबरू कराते हुए युवा पीढ़ी तक पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि, कार्यक्रम की थीम - 'भाषा का बाना ताना बाना' इसी सोच का प्रतिनिधित्व करती है। कार्यक्रम का प्रारंभ दीप प्रज्जवलन, स्वस्तिवाचन तथा गढ़वाली गीत उत्तराखंड मेरी मातृभूमि से किया गया। स्वस्तिवाचन पाठ डॉ चन्द्रमोहन बड़थ्वाल ने किया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि कोटद्वार नगर निगम के महापौर शैलेन्द्र सिंह रावत ने कहा कि, इस प्रकार के आयोजनों से लोक संस्कृति की विरासत से आने पीढ़ी लाभान्वित होती है तथा उन्हें अपनी संस्कृति, बोली-भाषा का ज्ञान होता है। उन्होंने इस प्रकार के कार्यक्रमों को व्यापक रूप से आयोजित करने पर जोर दिया। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि रंजना रावत, सुनीता कोटनाला, रश्मि सिंह, अभिलाषा भारद्वाज थी। सभी अतिथियों ने कार्यक्रम आयोजकों को बधाई देते हुए कहा कि, अपनी बोली-भाषा एवं सांस्कृतिक पहचान के लिए इस प्रकार के कार्यक्रमों की महत्ता बढ़ जाती है।

 कार्यक्रम दो सत्रों में आयोजित हुआ। प्रथम भाषा विमर्श के सत्र अध्यक्ष प्रसिद्ध भाषाविद लोकेश नवानी थे, वक्ता शांति प्रकाश जिज्ञासु, डॉ रोशन बलूनी, डॉ  विष्वकसेन दुदपुड़ी ने भाषा विमर्श में गढ़वाली भाषा के उद्भव एवं विकास की जानकारी साझा की तथा गढ़वाली भाषा को आठवीं अनुसूची में शामिल करने की जोरदार वकालत की।

द्वितीय सत्र में सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए। पी एमश्री राजकीय बालिका इंटर कॉलेज, कोटद्वार, पीताम्बर दत्त बड़थ्वाल राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय कोटद्वार की छात्राओ द्वारा शानदार प्रस्तुति दी गई। भाषा नवविधान के अंतर्गत राकेश मोहन ध्यानी द्वारा रचित लोक ग़ज़ल का प्रस्तुतीकरण किया गया। ग़ज़ल को चंद्र पाल राज ने सुर दिया तथा तबले पर संगत रोहन एवं बैंजो पर राकेश केष्टवाल थे। संगीत निर्देशक राकेश केष्टवाल ने इसका संयोजन किया। कार्यक्रम में हुडके पर प्रणव रावत ने जागर गायिका सूमा रावत के साथ शानदार प्रदर्शन किया। संस्था द्वारा लोक जागर गायिका सूमा रावत को मंच देने का लक्ष्य अपनी सांस्कृतिक विरासत को अंतरराष्ट्रीय मंच तक ले जाना है। प्रोफेसर भास्कर बौद्ध द्वारा ग़ज़ल की प्रस्तुति दी गई। शानदार जागर गायन के लिए बलूनी पब्लिक स्कूल की निदेशक अभिलाषा भारद्वाज ने जागर गायिका सूमा रावत को ₹ 5,000 की नगद धनराशि पुरस्कार स्वरूप भेंट की।

कार्यक्रम संयोजक गोविन्द डंडरियाल, विकास देवरानी, डा रश्मि बहुखंडी, चन्द्र मोहन कुकरेती, डॉ के. के. शर्मा थे।

 कार्यक्रम का संचालन राकेश मोहन ध्यानी ने किया‌।

इस अवसर पर चन्द्र प्रकाश नैथानी, ललन बुडाकोटी, अनसूया प्रसाद डंगवाल, बबीता ध्यानी, अजयपाल सिंह रावत, प्रकाश कोठारी, नागेन्द्र उनियाल आदि गणमान्य लोग उपस्थित थे।

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