भारतीय समाज में श्रीराम का चरित्र - TOURIST SANDESH

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रविवार, 14 जनवरी 2024

भारतीय समाज में श्रीराम का चरित्र

 भारतीय समाज में श्रीराम का चरित्र 

सुभाष चन्द्र नौटियाल




भारतीय समाज में श्रीराम के चरित्र को आदर्शता के रूप में पूर्ण श्रद्धा भाव के साथ स्वीकार किया जाता है। सनातनी संस्कृति में श्रीराम आदर्श व्यक्तित्व के रूप में स्थापित मर्यादाएँ, सर्वोच्चताएँ कहलाते हैं। संस्कृत भाषा के आदिकवि वाल्मिकी ने प्रथम संस्कृत में रामायण की रचना कर श्रीराम को भारतीय समाज में आदर्श व्यक्तित्व के रूप में प्रस्तुत किया। आदिकवि वाल्मिकी के बाद विभिन्न समुद्रों के अनेक संतों ने अपने-अपने अनूठेपन से प्रभु श्रीराम के आदि चरित्र का वर्णन किया, मानव समाज के सम्मुख शानदार ढंग से प्रस्तुत कर आदिकवि वाल्मिकी की परंपरा को आगे बढ़ाया। यही कारण है कि, प्रभु श्रीराम की भारतीय समाज में सर्वदा आदर्शता के रूप में मान्यता रही है। 

वैसे तो हिंदी भाषा में भी अनेक संतों ने श्रीराम के चरित्र का अपने-अपने ढंग से श्रेष्ठ साहित्य का सृजन कर समाज को समय-समय पर मानवीय आस्था के लिए उद्वेलित किया है परंतु कविवर गोस्वामी तुलसीदास ने श्रीराम के चरित्र का गौरवपूर्ण शैली में सर्वोत्तम वर्णन किया है किया है. कविवर तुलसीदास ने अपने महाकाव्य 'रामचरितमानस' में प्रभु श्रीराम के जीवन का अत्यंत सुंदर और भावपूर्ण रूप से प्रस्तुतीकरण कर संपूर्ण मानव भावनाओं को अपने महाकाव्य में समाहित किया है। तुलसीकृत 'रामचरितमानस' में श्रीराम के सुरुचिपूर्ण और वैभवशाली रूप से श्रीराम के चरित्र का गुणगान है, क्योंकि श्रीराम का चरित्र जन-जन तक पहुंचता है। श्रीराम के चरित्र को प्राथमिकता के शिखर तक पहुंचाने में तुलसीकृत 'रामचरितमानस' का बहुत बड़ा योगदान है। 'रामचरितमानस' हिन्दी साहित्य की एक अमूल्य निधि है। 

तुलसीदास ने श्रीराम को एक आदर्श पुरूष के रूप में चित्रित किया है। जिसमें एक आदर्श व्यक्तित्व के सभी गुणों का शानदार ढंग से समावेश किया गया है। वे सत्य, न्याय, सदाचार, साहस, धैर्य, करुणा, दया, क्षमा और नेतृत्व करने में श्रेष्ठ गुणों के धनी हैं। प्रभु श्रीराम मानव समाज में एक आदर्श पुत्र, भाई, पति, राजा और मित्र हैं। 

कविवर तुलसीदास ने श्रीराम के चरित्र का वर्णन करते हुए समय लीलाओं, भावनाओं और संवादों का बहुत ही सुंदर ढंग से वर्णन किया है, उनके शब्दों में भव्य, सभ्य और सुरूचिपूर्ण व्यक्तित्व का वर्णन किया गया है। उन्होंने न केवल श्रीराम के जीवन के विभिन्न पक्षों को शामिल किया है, बल्कि महान महापुरुषों के चरित्र का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया है। जैसे कि, बाल लीलाएँ, शिक्षा-दीक्षा, विवाह, वनवास, असुरों से युद्ध, मातृ प्रेम, भ्रातृप्रेम, मित्रता तथा राज्याभिषेक आदि-आदि। 

अपने महाकाव्य रामचरितमानस के माध्यम से कवि तुलसीदास ने श्रीराम के चरित्र को मानव समाज में आदर्श व्यक्तित्व के रूप में स्थापित किया। उनके द्वारा स्थापित प्रभु श्रीराम का व्यक्तित्व मानव समाज में सभी मानवों के लिए आदर्श एवं अनुकरणीय है। 

दरअसल अगर देखा जाए तो वर्तमान में मानव समाज में तुलसीकृत रामचरितमानस ने ही प्रभु श्रीराम को एक प्रसिद्ध आराध्य देव के रूप में प्रतिष्ठित किया है। 

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